शिमला। हिमाचल प्रदेश ने दिसम्बर, 2019 तक की राजस्व प्राप्तियों की तुलना में दिसम्बर, 2020 तक आबकारी और कराधान विभाग के सभी हैड्स से राजस्व प्राप्तियों में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 619 करोड़ रुपये के मुकाबले इस वर्ष दिसम्बर, 2020 तक 772 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। यह सकारात्मक रूझान पिछले चार महीनों से निरंतर जारी है। विभाग के राजस्व में अगस्त के दौरान 15 फीसदी, सितंबर में 10 फीसदी, अक्टूबर में 37 फीसदी और नवम्बर, 2020 में 9 फीसदी की वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को यहां यह जानकारी देते हुए कहा कि दिसम्बर, 2020 में मूल्य वर्धित कर (वैट) में 45 फीसदी, कराधान राजस्व में 29 फीसदी और राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में 16 फीसदी की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि राजस्व प्राप्तियों में यह उल्लेखनीय वृद्धि आर्थिक गतिविधियों की बहाली, सरकार की अनलाॅक रणनीति, करदाताओं द्वारा बेहतर अनुपालन और विभाग द्वारा प्रभावी प्रशासन के कारण सम्भव हुई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कोविड-19 के बावजूद वर्तमान वित्त वर्ष और पिछले वित्तीय वर्ष के संचयी राजस्व के बीच का अंतर दिसंबर, 2020 में घटकर 7 फीसदी रह गया, जो जुलाई, 2020 में 39 फीसदी था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा, प्रदर्शन कार्ड के माध्यम से फील्ड इकाइयों की निगरानी की नई पहल ने फील्ड अधिकारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कार्य वातावरण तैयार किया है, जहां प्रत्येक प्राधिकरण निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित होता है। इससे प्रदेश की राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि लाने में सहायता मिली है। मुख्यालय स्तर पर बढ़ी हुई विश्लेष्णात्मक और डेटा संचालित क्षमताओं के कारण क्षेत्रीय इकाइयों के प्रयासों को और अधिक मजबूती मिली है।
जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य की राजस्व प्राप्तियों को बढ़ाने के लिए लीगेसी मामलों के समाधान योजना के तहत वसूली, ई-वे बिल का भौतिक सत्यापन, जीएसटीआर3बी रिटर्न भरने का अनुपालन, रिटर्न देरी से भरने पर ब्याज वसूली, अनुचित आइटीसीएस वसूली और टैक्स चोरी से वसूली जैसे मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि कर चोरी से संबंधित मामलों की पहचान और राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए राज्य की राजस्व हानि के तरीकों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
