किन्नौर और लाहौल-स्पीति के बाद पांगी-भरमौर में भी निकलेगी अधिकार यात्रा, मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ की बहाली की मांग को लेकर जनजातीय समुदाय ने अधिकार यात्रा शुरू की है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति के बाद अब चंबा के पांगी और भरमौर में भी पदयात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद जनजातीय समुदाय के लोग शिमला पहुंचकर राजभवन तक मार्च करेंगे और अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे। यह बात जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य केसर नेगी ने मंगलवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कही।
केसर नेगी ने कहा कि नौतोड़ की बहाली से जुड़ा मसौदा पिछले करीब पौने चार साल से राज्यपाल के पास लंबित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की पहली कैबिनेट में फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 को निलंबित करने का मसौदा पारित कर राज्यपाल को भेजा गया था ताकि जनजातीय क्षेत्रों में नौतौड़ की व्यवस्था बहाल हो सके। उनका दावा है कि इतने लंबे समय के बाद भी इस मामले में अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है।
केसर नेगी के मुताबिक राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी समेत जनजातीय क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि और जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य कई बार राज्यपाल से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के प्रावधानों में छूट मिलने के दौरान किन्नौर में सैकड़ों लोगों को नौतोड़ के पट्टे दिए गए थे। जनजातीय समुदाय लंबे समय से इसी अधिकार की बहाली की मांग कर रहा है। उन्होंने बताया कि किन्नौर और लाहौल-स्पीति में अधिकार यात्रा जारी है, जबकि जल्द ही चंबा के पांगी और भरमौर में भी यात्रा निकाली जाएगी। तीनों जनजातीय क्षेत्रों में यात्रा पूरी होने के बाद पदयात्री शिमला पहुंचेंगे। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और इसके बाद राजभवन तक मार्च निकाला जाएगा।
केसर नेगी ने कहा कि जनजातीय समुदाय राज्यपाल से इस मामले में सकारात्मक जवाब मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नौतोड़ की बहाली की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
