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शिमला। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने सुधीर शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के खिलाफ दिए गए कथित अमर्यादित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा को अपनी बोल-वाणी सुधारनी चाहिए और हिमाचल की संस्कृति, सभ्यता एवं सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप सार्वजनिक जीवन में भाषा का प्रयोग करना चाहिए। 

राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए जिस प्रकार की असभ्य भाषा का प्रयोग किया गया है, वह बेहद निंदनीय है। हिमाचल की संस्कृति में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत मर्यादा और सम्मान बनाए रखने की परंपरा रही है। ऐसी अमर्यादित भाषा हिमाचली समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा ऐसी बयानबाजी के माध्यम से सुर्खियों में आने और अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। जिस राजनीतिक दल में वे वर्तमान में हैं, वहां इस प्रकार की भाषा बोलने वालों को प्रोत्साहन मिलने का इतिहास रहा है। संभवतः इसी कारण वे भी ऐसी बयानबाजी के माध्यम से अपना राजनीतिक कद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

राजेश धर्माणी ने कहा कि सुधीर शर्मा को यह समझ लेना चाहिए कि हिमाचल की जनता बड़बोली और अमर्यादित राजनीति को पसंद नहीं करती। उन्होंने कहा कि भाजपा के भीतर भी विभिन्न गुटों के बीच चल रही खींचतान के बीच इस प्रकार की बयानबाजी से उन्हें कोई राजनीतिक लाभ मिलने वाला नहीं है। हिमाचल की जनता सब देख और समझ रही है तथा समय आने पर इसका जवाब भी देगी। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा अपनी राजनीतिक कुंठा के कारण मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हें इस तरह की शब्दावली से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री को हिमाचल की जनता भली-भांति जानती है। वे आम जनता के बीच से निकलकर राजनीति में आए हैं और आम आदमी की समस्याओं और उनके दर्द को समझते हैं। यही कारण है कि वे लगातार आम लोगों के बीच रहते हैं और उनसे सहजता से जुड़ते हैं। 

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री का आम लोगों के बीच जाना और उनसे सहजता से मिलना हिमाचली संस्कृति की सादगी और अपनापन दर्शाता है। यदि मुख्यमंत्री किसी सामान्य व्यक्ति के पास जाकर अपने बाल कटवाते हैं तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। आम व्यक्ति के साथ सहजता से जुड़ना किसी नेता की कमजोरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसके जुड़ाव और संवेदनशीलता का प्रमाण है।

राजेश धर्माणी ने कहा कि राजनीतिक विचारों में मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादा और भाषा की शालीनता बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने सुधीर शर्मा से आग्रह किया कि वे बयानबाजी में संयम बरतें और हिमाचल की सभ्य एवं संस्कारित राजनीतिक परंपरा का सम्मान करें।

By admin

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