शिमला। स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के विरोध में वीरवार को शिमला के प्रतिबंधित माल रोड स्थित स्कैंडल प्वाइंट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान एसएफ़आई के राज्य स्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियां देकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस दाैरान जमकर धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शन के दाैरान एसएफआई कार्यकर्ता मालरोड पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। इस दाैरान पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को जबरन उठाकर अपने वाहनों में ले गई।
एसएफ़आई हिमाचल प्रदेश राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर तथा राज्य सचिव सनी सेक्टा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी देशभर के करोड़ों विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक विफलता, जवाबदेही के अभाव और छात्र हितों की उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने की घटनाएं, तकनीकी खामियां और अन्य अनियमितताओं ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका खामियाज़ा लाखों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा है।

एसएफ़आई नेताओं ने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक, यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने, सीयूईटी सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरे संकट को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि हर पेपर लीक और हर रद्द हुई परीक्षा के पीछे लाखों विद्यार्थियों के सपने, वर्षों की मेहनत और उनका भविष्य दांव पर लग जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक और 48 पुनर्परीक्षाओं की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। संगठन ने हाल ही में सामने आए नीट-यूजी 2026 विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं जून 2024 में यूजीसी-नेट परीक्षा को आयोजित होने के एक दिन बाद रद्द करने की घटना को भी एनटीए की कार्यप्रणाली की बड़ी विफलता बताया गया।
एसएफ़आई नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार विद्यार्थियों को निष्पक्ष और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने में पूरी तरह असफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार विद्यार्थियों की आवाज़ को दबाने और अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रही है।

एसएफ़आई नेताओं ने कहा कि एसएफ़आई अपने स्थापना काल से ही शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों, सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा और छात्र हितों पर हो रहे हमलों के खिलाफ़ संघर्ष करती रही है। फीस वृद्धि, शिक्षा के निजीकरण, सार्वजनिक निवेश में कटौती, छात्र संघों पर प्रतिबंध तथा परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर संगठन लगातार आंदोलन करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनटीए से जुड़ा संकट केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाला राष्ट्रीय मुद्दा है। ऐसे समय में जब छात्र कठिन प्रतिस्पर्धा और बढ़ते आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं, सरकार परीक्षा प्रणाली की बुनियादी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में भी विफल रही है।
एसएफआई की ये हैं प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान एसएफ़आई ने कई मांगें उठाईं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफ़े, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को समाप्त करने, परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को रद्द करने, परीक्षा घोटालों की स्वतंत्र न्यायिक जांच, दोषियों के खिलाफ़ राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठकर कठोर कार्रवाई तथा प्रभावित विद्यार्थियों को उचित मुआवज़ा और राहत प्रदान करने की मांग प्रमुख रही। एसएफ़आई नेताओं ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा। संगठन ने घोषणा की कि आंदोलन के अगले चरण के तहत 19 जून 2026 को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय की ओर आयोजित मार्च में हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में छात्र भाग लेंगे। इस मार्च के माध्यम से शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े और एनटीए को समाप्त करने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती से उठाया जाएगा।
