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कहा – लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार करने में लगी है सरकार 

प्रदेश में खड़ा हुआ संवैधानिक संकट – रणधीर शर्मा 

शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों को स्थगित कर संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं का खुला उल्लंघन कर रही है।

रणधीर शर्मा ने शुक्रवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहले शहरी निकाय चुनावों को टालने की कोशिश की और अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को भी स्थगित करने की साजिश रच रही है। उन्होंने बताया कि बीते दिन प्रदेश के कई जिलों के उपायुक्तों से यह पत्र मंगवाए गए कि आपदा के चलते जिले की स्थिति ठीक नहीं है और सड़क नेटवर्क बाधित होने के कारण चुनाव कराना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का आरोप है कि इन चार उपायुक्तों के पत्रों को सचिव, पंचायती राज विभाग के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट सेल तक पहुंचाया और उसके बाद तत्काल आदेश जारी कर दिए गए कि भारी वर्षा से हुए नुकसान के चलते चुनाव अभी कराना व्यावहारिक नहीं है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि इस आदेश की प्रतियां सभी जिलाधीशों, राज्य निर्वाचन आयोग तथा अन्य संबंधित विभागों के सचिवों व निदेशकों को भेजी गईं। लेकिन जब भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया, तो सरकार ने अपने ही आदेशों से पलटी मार ली। कल देरशाम को पंचायती राज मंत्री और शुकवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव समय पर ही होंगे। रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री के बयानों में विरोधाभास साफ झलकता है, जिससे प्रदेश में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। 

यदि समय पर ही चुनाव होने हैं तो आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ से आदेश जारी करने की क्या आवश्यकता थी – रणधीर शर्मा 

रणधीर शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि चुनाव समय पर ही होने हैं, तो फिर उपायुक्तों से पत्र मंगवाने और आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ से आदेश जारी करने की क्या आवश्यकता थी? भाजपा का स्पष्ट आरोप है कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है और किसी न किसी बहाने चुनाव टालना चाहती है। भाजपा नेता ने कहा कि इससे पहले भी कांग्रेस सरकार ने शहरी निकाय चुनावों को टालने का प्रयास किया था। सरकार ने नई शहरी इकाइयों का गठन तो कर दिया, परंतु छह माह के भीतर चुनाव कराने के प्रावधान को दरकिनार कर अध्यादेश लाया और कार्यकाल दो वर्ष तक बढ़ा दिया। बाद में विधानसभा सत्र में इस अध्यादेश को संशोधन विधेयक के रूप में पारित भी करवा लिया गया।

रणधीर शर्मा ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने 24 मई, 2025 को तीन शहरी निकायों की वार्डबंदी को लेकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी थी और आपत्तियाँ आमंत्रित की थीं। लेकिन बीच में ही शहरी विकास विभाग के सचिव द्वारा एक पत्र जारी कर इस प्रक्रिया को रोक दिया गया। यह सब दर्शाता है कि सरकार जानबूझकर चुनावों में देरी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस अलोकतांत्रिक रवैये का पुरजोर विरोध करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। 

By admin

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