शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मांग की है कि कोविड महामारी के इस समय भयंकर फैलाव को रोकने के लिए सरकार को बहुत ही संवेदनशीलता से जन हितकारी निर्णय लेने की आवश्यकता है। सरकार की प्राथमिकता टेस्टिंग बढ़ाने, ऑक्सीजन एवं वैक्सीन की उपलब्ध्ता सुनिश्चित करना तथा स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाना होनी चाहिए। ऐसे में कोविड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड मानकों के मुताबिक 5 से 7 दिनों का क्वारंटीन पीरियड दिया जाए तथा पर्याप्त स्टाफ विशेषकर वार्ड ब्वाय एवं नर्सिंग स्टाफ को भर्ती किया जाए, कोविड अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं, पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पार्टी के राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद और पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य डाॅ. कुलदीप सिंह तंवर ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि इस संक्रमण काल में सरकार कोरोना योद्धाओं के प्रति संवेदनहीन रवैया अपना रही है। इससे चरमाराती हुई स्वास्थ्य व्यवस्था के अंदर अपनी जान को जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
इन नेताओं ने कहा कि कोविड महामारी की इस दूसरी लहर से आज देशभर में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। देश में लगभग 4 लाख संक्रमण के आंकड़ों के साथ 4 हजार मौतों का आंकड़ा पार कर दिया है। वहीं प्रदेश में भी करीब 4 हजार संक्रमण के साथ 65 से अधिक मौतें अपनेआप में डरावनी तस्वीर पेश करती है। उन्होंने कहा कि अब इस महामारी का संक्रमण गांवों की होना अत्यंत चिंताजनक है, जहां स्वास्थ्य का ढांचा चरमराया हुआ है। इस महामारी से अस्पतालों के अंदर लड़ाई लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों की बड़े पैमाने पर मौतें हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है। उन्होंने कहा कि सरकारों द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगभग एक फीसदी से अधिक खर्च न बढ़ाने से स्वास्थ्य का ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है।
माकपा नेताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति के चलते इस महामारी में हमारे देश के 750 से अधिक डाॅक्टरों तथा 1200 से अधिक पैरा मेडिकल स्टाफ को अपनी आहुति देनी पड़ी है, जबकि सरकार की बीमा लाभ पहुंचाने वाली घोषणाएं खोखली साबित हुई हैं। आज इस महामारी के गहरे संकट के समय सार्वजनिक क्षैत्र से जुड़े स्वास्थ्य संस्थाओं में कमजोर ढांचे से ही विपरीत परिस्थितियों में भी सेवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविड अस्पतालों में सेवाएं देने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों के क्वारंटीन पीरियड में लगातार कटौती करते हुए सरकार ने इसे लगभग खत्म ही कर दिया है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के घर-परिवार, सहयोगियों एवं कार्यस्थल में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। साथ ही मानसिक तनाव के शिकार होते जा रहे हैं। इसके साथ ही कोविड अस्पतालों में पर्याप्त वार्ड ब्वायों एवं सफाई व सुरक्षा कर्मियों की भारी कमी है। कमला नेहरू अस्पताल में व्यवस्था के हाल और भी बदतर हैं, जहां कोविड वार्ड एवं अन्य सामान्य वार्डों में सेवाएं देने वाले वही कर्मी हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।
