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केएनएच अस्पताल की ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने के फैसले पर फिर विचार करने का किया आग्रह 

शिमला, 12 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव संजय चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) की स्त्री रोग (गायनाकोलॉजी) ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) परिसर में स्थानांतरित करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

चौहान ने अपने पत्र में कहा कि सरकार के इस फैसले से आम जनता में भारी नाराजगी है और इसके खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस निर्णय से सहमत नहीं है और मांग करती है कि ओपीडी को वर्तमान स्थान, कमला नेहरू अस्पताल में ही संचालित किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि केएनएच को उसके मौजूदा स्थान से हटाया जाता है तो यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और केंद्र सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन होगा। साथ ही आईजीएमसी के ओपीडी परिसर में पहले से ही जगह की कमी और भीड़भाड़ की स्थिति बनी हुई है, जिससे वहां अतिरिक्त बोझ बढ़ने पर मरीजों की परेशानियां और बढ़ेंगी।

ऐतिहासिक और भावनात्मक जुड़ाव का भी हवाला 

संजय चौहान ने कमला नेहरू अस्पताल के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल, जिसे पहले लेडी रीडिंग हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता था, का निर्माण वर्ष 1924 में ब्रिटिश काल में हुआ था और पिछले लगभग 100 वर्षों से यह प्रदेश का प्रमुख मातृ एवं शिशु अस्पताल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में प्रतिदिन 300 से 400 महिलाएं इलाज के लिए आती हैं और यहां 300 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेशभर की महिलाओं को यहां प्रसूति, स्त्री रोग, प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर सेवाएं सुलभ और किफायती दरों पर मिलती हैं, जिनमें से अधिकांश सेवाएं निशुल्क हैं।

आधुनिकीकरण पर खर्च और भविष्य की योजनाएं 

संजय चौहान ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर धनराशि उपलब्ध करवाई गई है। वर्ष 2013 में लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण शुरू किया गया था, जो अब तैयार है और इसमें ओपीडी, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

इसके अलावा तीसरे चरण में पुराने भवन की जगह अत्याधुनिक ढांचे के निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है, जिसमें आईवीएफ सेंटर, प्राइवेट वार्ड और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं।

पहले भी हो चुका है विरोध 

चौहान ने याद दिलाया कि इससे पहले भी इस अस्पताल को आईजीएमसी परिसर में स्थानांतरित करने की योजना सामने आई थी, लेकिन जनता के विरोध के चलते सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में यह चर्चा है कि अस्पताल की जमीन पर विधायकों के लिए नए भवन का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे लोगों में और अधिक असंतोष है।

जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील

चौहान ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक जीवन भी शिमला शहर से जुड़ा रहा है और वे यहां की जनभावनाओं से भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि शहर के अधिकांश परिवारों का इस अस्पताल से भावनात्मक जुड़ाव है और इसे स्थानांतरित करना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस निर्णय को तुरंत वापस लें और अस्पताल के तीसरे चरण के विकास कार्य को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करें।

By admin

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