शिमला। कोलकाता में आयोजित 18वें अखिल भारतीय जन विज्ञान महासम्मेलन में हिमाचल प्रदेश के “युवा बचाओ अभियान” और मंडी मॉडल को सराहा गया। 27-30 दिसंबर तक हुए इस महासम्मेलन में देशभर से 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति और तकनीकी एवं विकास समिति से 18 प्रतिनिधियों ने प्रदेश की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया।
महासम्मेलन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा नीति, जलवायु संकट, सामाजिक न्याय और कृषि जैसे 40 से अधिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। हिमाचल के “युवा बचाओ अभियान” को नशा उन्मूलन के लिए प्रभावी मॉडल मानते हुए इसे देशभर में लागू करने की सिफारिश की गई।
इस महासम्मेलन में विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में चुनौतियों, नई शिक्षा नीति, पर्यावरण, जलवायु संकट, जेंडर समानता, सामाजिक न्याय, कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर 40 से अधिक सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की गईं। प्रो. सत्यजीत रथ, आशा मिश्रा, प्रोबीर पुरकास्था, डॉ. डी. रघुनंदन और प्रोमिता चक्रवर्ती जैसे विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
हिमाचल प्रदेश से सत्यवान पुंडीर, डॉ. ओ.पी. भूरेटा, डॉ. आर.के. शर्मा, सीता राम ठाकुर, ललित शर्मा, सुनीता बिष्ट और अन्य प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। हिमाचल से आए प्रतिनिधियों ने नशा उन्मूलन अभियान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, और स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। इन प्रयासों के माध्यम से प्रदेश में जन विज्ञान आंदोलन के हस्तक्षेप और सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया गया।
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुंडीर ने बताया कि इस सम्मेलन के अंतिम दिन पश्चिम बंगाल के विकास पर एक विशेष सेमिनार आयोजित हुआ। समापन सत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जनमानस तक पहुंचाने और समाज में सकारात्मक सोच का विकास करने का आह्वान किया गया। साथ ही, रूढ़िवादी सोच को समाप्त कर संगठनों की इकाइयों को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। पुंडीर ने बताया कि आने वाले समय में संगठन में बुद्धिजीवियों, प्रोफेशनल्स, युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता से जोड़ने और कार्यकर्ताओं की क्षमता विकास के लिए देशव्यापी अभियान चलाने की योजना बनाई गई।
