कुल्लू। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, व सड़क क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा वर्ष 2023-24 के बजट में स्वास्थ्य के लिए 3 हजार 139 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। यह बात रविवार को मुख्य संसदीय सचिव (ऊर्जा, पर्यटन, वन व परिवहन) सुंदर सिंह ठाकुर ने कुल्लू स्थित अटल सदन में स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू द्वारा आयोजित राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही।
सुंदर ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके घर द्वार के निकट विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत वर्तमान प्रदेश सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक आदर्श स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने का निर्णय लिया है। इन स्वास्थ्य संस्थान में विभिन्न विशेषज्ञों और अन्य स्टाफ सहित 134 तरह की लेबोरेटरी जांच सुविधाएं तथा आवश्यकतानुसार लेटेस्ट स्टेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलॉजी की एमआरआई ,सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी ताकि स्थानीय निवासियों की जिला अस्पताल तथा मेडिकल कॉलेजों पर निर्भरता कम हो सके तथा उन्हें घर द्वार के निकट विशेषज्ञ व अति आधुनिक सेवाएं उपलब्ध हो सके।
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विस कारपोरेशन का गठन करने जा रही है ताकि विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक दवाइयां, आधुनिक मशीनरी एवं उपकरण की खरीद उचित मूल्य पर की जा सके। साथ ही समय पर उनकी आपूर्ति सुनिश्चित बनाई जा सके।
मुख्य संसदीय सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति प्रयासरत है, जिसके तहत प्रथम चरण में मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपए की राशि का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कैजुअल्टी विभाग में एक बिस्तर पर एक से अधिक मरीज पाए जाते हैं। इस कारण मरीजों को अन्य बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में कैजुअल्टी विभाग को अपग्रेड करके इमरजेंसी मेडिसिन डिपार्टमेंट बनाया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से 50 बिस्तरों की क्षमता के क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स का निर्माण किया जाएगा। इस सेवा को सप्ताह में 24 घंटे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उपयुक्त विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी, स्टाफ नर्स एवं अन्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने समस्त क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के स्टाफ को उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी तथा कहा कि इनके कठिन परिश्रम के चलते क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक व कायाकल्प में प्रथम स्थान प्राप्त कर सका। उन्होंने कोविड के समय शोभला साथी ट्रस्ट, स्वास्थ्य विभाग व अन्य द्वारा दी गई सेवाओं के लिए बधाई दी।
ठाकुर ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अनेक पग उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल में व्यवस्था परिवर्तन नजर आ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में पिछले लंबे समय से रिक्त पड़े चिकित्सकों के पद भरे जा रहे हैं। पिछले कई वर्षों से बंद अल्ट्रासाउंड को प्रदेश में नई सरकार बनते ही आरम्भ किया गया है, जिससे अब गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में ही ये सुविधा उपलब्ध होनी शुरू हो गई है।
सीपीएस ने इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए चिकित्सकों,पेरा मेडिकल स्टाफ,व अन्य कर्मचारियों को सम्मानित किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नागराज पवार ने स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य अरुणा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश चंद व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विस कारपोरेशन का गठन करने जा रही है ताकि विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक दवाइयां, आधुनिक मशीनरी एवं उपकरण की खरीद उचित मूल्य पर की जा सके। साथ ही समय पर उनकी आपूर्ति सुनिश्चित बनाई जा सके।
मुख्य संसदीय सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति प्रयासरत है, जिसके तहत प्रथम चरण में मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपए की राशि का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कैजुअल्टी विभाग में एक बिस्तर पर एक से अधिक मरीज पाए जाते हैं। इस कारण मरीजों को अन्य बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में कैजुअल्टी विभाग को अपग्रेड करके इमरजेंसी मेडिसिन डिपार्टमेंट बनाया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से 50 बिस्तरों की क्षमता के क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स का निर्माण किया जाएगा। इस सेवा को सप्ताह में 24 घंटे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उपयुक्त विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी, स्टाफ नर्स एवं अन्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने समस्त क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के स्टाफ को उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी तथा कहा कि इनके कठिन परिश्रम के चलते क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक व कायाकल्प में प्रथम स्थान प्राप्त कर सका। उन्होंने कोविड के समय शोभला साथी ट्रस्ट, स्वास्थ्य विभाग व अन्य द्वारा दी गई सेवाओं के लिए बधाई दी।
ठाकुर ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अनेक पग उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल में व्यवस्था परिवर्तन नजर आ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में पिछले लंबे समय से रिक्त पड़े चिकित्सकों के पद भरे जा रहे हैं। पिछले कई वर्षों से बंद अल्ट्रासाउंड को प्रदेश में नई सरकार बनते ही आरम्भ किया गया है, जिससे अब गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में ही ये सुविधा उपलब्ध होनी शुरू हो गई है।
सीपीएस ने इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए चिकित्सकों,पेरा मेडिकल स्टाफ,व अन्य कर्मचारियों को सम्मानित किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नागराज पवार ने स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य अरुणा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश चंद व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
