शिमला। जन स्वास्थ्य अभियान हिमाचल और हिमाचल ज्ञान-विज्ञान समिति ने कहा कि राज्य में अंततः 18 से 44 आयु वर्ष के लिए वैक्सीनेशन शुरू हो ही गया। इसका जन स्वास्थ्य अभियान एवं हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति स्वागत करती है। कोविड महामारी की इस दूसरी लहर के भयंकर संक्रमण की रफ्तार को रोकने व इसे कमजोर करने में निश्चित तौर पर वैक्सीनेशन ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जन स्वास्थ्य अभियान हिमाचल के राज्य संयोजक सत्यवान पुंडीर और हिमाचल ज्ञान-विज्ञान समिति के राज्य महासचिव जीयानंद शर्मा ने सोमवार को यहां कहा कि 18 से 44 आयु वर्ष के लिए शुरू किए इस वैक्सीनेशन में कुछ अहम कमियां दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस आयु वर्ग के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सही प्रकार से आईईसी व प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिससे शहरी क्षेत्र में तो जागरूकता के कारण युवा वर्ग में उत्साह देखा गया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कोई दिलचस्पी नहीं रही।पुंडीर और शर्मा ने कहा कि जहां पर 4जी नेट और कनेक्टिविटी ठीक है, वहां पर पोर्टल पर आसानी से अपलोड हो गए, लेकिन जहां सिग्नल की कमी थी, वहां पर पंजीकरण में काफी दिक्कतें रहीं। इसलिए आगामी समय में ग्रामीण क्षेत्र के मद्देनजर व्यवस्था करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल अंग्रेजी भाषा में है, जिससे अंग्रेजी न जानने व समझने वालों तथा ग्रामीण क्षेत्र में समस्या आ सकती है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण होने के बाद शेड्यूल बुक करने के स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं होने से कई युवा मोबाइल पर संदेश आने के इंतजार में थे।
पुंडीर और शर्मा ने कहा कि इसकी पर्याप्त जानकारी तथा प्रचार प्रसार की कमी के कारण अधिकांश युवा इसका लाभ नहीं उठा पाए। उन्होंने कहा कि यह अभियान अपनेआप में रोचक है तथा कोविड महामारी के प्रति जागरुकता के तौर पर भी कार्य कर रहा है। लेकिन वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण इस आयु वर्ग के लिए वैक्सीनेशन की मुहिम को शुरू करने में की गई देरी से तीव्र संक्रमण के लिए इस वर्ग की भी अहम भूमिका रही है। इससे सीख लेते हुए जन स्वास्थ्य अभियान सरकार से वैक्सीन बढ़ाने की मांग करता है। क्योंकि वैक्सीन ही इस भयंकर संक्रमण को रोकने व कमजोर करने तथा तीसरी लहर को रोकने में सहायक हो सकती है।
जन स्वास्थ्य अभियान हिमाचल प्रदेश एवं हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जो इस समय देशभर में कोविड संक्रमण में अग्रणी पंक्ति में है, के लिए वैक्सीन की मात्रा बढ़ाने तथा इसके लिए व्यापक तौर पर लोगों को तैयार करने के लिए विषेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। इस कार्य के लिए पंचायती राज संस्थाओं, शहरी निकायों, सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं, सामाजिक -धार्मिक संगठनों को बड़े पैमाने पर शामिल करने की जरूरत है।
