शिमला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश विवि में एक ऐजेंडे के तहत एक ही विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले लोगों को नियुक्तयां दी जा रही हैं। उन्होंने इन नियुक्तियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इसमें कायदे-कानूनों को दरकिनार कर अयोग्य लोगों को नियुक्तियां दी जा रही हैं और इसके लिए विवि की ईसी से भी कोई मंजूरी नहीं ली जा रही है।
राठौर ने राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, जो विश्विद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, से इस विश्विद्यालय में हुई शिक्षकों की नियुक्तियों की तुरंत जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति एक विशेष एजेंडे के तहत कार्य कर रहे हैं और विश्वविद्यालय का पूरी तरह से भगवाकरण किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसकी जांच नही करवाई गई तो कांग्रेस सत्ता में आते ही इन नियुक्तियों की जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करेगी। राठौर ने आज यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप बैठने वाली नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष एजेंडे के तहत विश्विद्यालय को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।
राठौर ने हाल ही में हुई नियुक्तियों का पूरा विवरण देते हुए कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय में सितम्बर 2020 से विभिन्न विभागों में चल रही शिक्षकों के पदों पर भर्ती में यूजीसी की गाईडलाईनस की पूरी तरह अवहेलना की जा रही है। इन नियुक्तियों की पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कोविड महामारी के बीच जल्दबाजी व अफरा-तफरी में ये नियुक्तियां की जा रही इन नियुक्तियों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए विश्विद्यालय की मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगाया।
राठौर ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं सहायक प्रोफेसर की नियुक्तियों के आवेदन पत्रों की छानबीन के लिए समस-समय पर यूजीसी की ओर गाईडलाईंस जारी की जाती हैं। यूजीसी की गाईडलाईंस को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुये विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझ कर समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र विभाग में शिक्षक भर्ती के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया, जिसमें इन विभागों में नियुक्त नियमित शिक्षकों को दरकिनार करते हुए बाहर से सेवानिवृत्त शिक्षकों को अधिमान दिया गया। इसके अलावा कुछ अन्य विभागों में भी नियमों को किनारे करते हुए नियुक्तियां की गई और साक्षात्कार के दिन ही नियुक्तियां भी दी गई।
कुलदीप राठौर ने कहा कि विश्वविद्यालय में कुछ विभागों में शिक्षक भर्ती में पाया गया है कि नियुक्ति देने में ऐसे अपात्र उम्मीदवारों को ऐसोसिएट प्रोफेसर पद पर सीधी नियुक्तियां दी गई, जोकि सहायक प्रोफेसर की योग्यता भी नहीं रखते। उन्होंने कहा कि चयन समिति की सिफारिशों को विचारार्थ व अनुमोदन के लिए कार्यकारी परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन साक्षात्कार के दिन ही उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जहां भर्ती नियमों की घोर अवेहलना की गई है। राठौर ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया में इन पदों के विज्ञापन एक वर्ष के लिए होता है, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस समय अवधि के बाद इसे जानबूझकर अतिरिक्त 6 महीनों के लिए आगे बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार संस्थान में कोविड काल में सरकार की पूर्व अनुमति के बगैर किसी भी नई नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध था।
राठौर ने कहा कि कुछ शिक्षकों को नियुक्तियों में निजी संस्थानों में किए गए कार्यों को भी जोड़ा गया है और इसका भी लाभ दिया गया है, जबकि ऐसा नहीं होता है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस सारे मामले की गंभीरता से जांच करवाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि राज्यपाल ने ऐसा न किया तो कांग्रेस अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगी।
