भाजपा के 28 में से 16 विधायक नहीं जीत पाएंगे अगला चुनाव : सुक्खू
राज्य पर कुल कर्ज 99564 करोड़ रुपये, भाजपा सरकार से कम लिया है काग्रेस सरकार ने कम कर्ज – मुख्यमंत्री
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को विपक्षी भाजपा पर तीेखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व को अपने ही सर्वेक्षणों पर गौर करने की नसीहत देते हुए दावा किया कि उसके 28 में से 16 विधायक अगला विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में खींचतान से इसका आलाकमान भी परेशान है।
मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भाजपा पिछली बार के मुकाबले कम सीटों पर सिमट जाएगी। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के अलग-अलग गुट अपने-अपने स्तर पर ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री का दावा किया कि पार्टी के भीतर एक गुट जयराम ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर आए दिन सरकार पर बयान देते रहते हैं, लेकिन वह उन पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी। साथ ही इस दौरान लिए गए कड़े फैसलों से बेहतर हुई राज्य की आर्थिक स्थिति का भी हवाला दिया। इस दौरान उन्होंने भाजपा द्वारा कर्ज के मुद्दे पर की जा रही टिप्पणी पर उन्हें घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 43261 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2023 तक राज्य पर कुल 76633 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने एक अप्रैल 2023 से 20 अक्टूबर 2026 तक 37781 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य पर अभी तक कुल कर्ज 99564 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा बार-बार कहती है कि कर्ज एक लाख करोड़ रुपए से अधिक होकर गया है। मुख्यमंत्री ने भाजपा के कर्ज संबंधी आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही कर्ज ले सकती है। उन्होंने विपक्ष से आर्थिक मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की अपील की।

बीबीएमबी मामले में हिमाचल को फैसले का इंतजार
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है और प्रदेश सरकार को हिमाचल के पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में हरियाणा और केंद्र सरकार की ओर से हलफनामे दाखिल किए गए हैं, जबकि पंजाब सरकार ने अलग रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि आने वाला फैसला हिमाचल के हितों के अनुरूप होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विभिन्न स्रोतों से करीब 4,000 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने इसे राज्य के आर्थिक संसाधन बढ़ाने और हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा करने के साथ आय के नए स्रोत तलाशने पर भी काम कर रही है। बीबीएमबी मामले में राज्य के अधिकारों की पैरवी और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के प्रयास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक और सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले बड़े अस्पतालों में आवश्यक स्टाफ की कमी और पुरानी जांच मशीनों के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई मरीजों को जांच के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता था। सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं पर निवेश किया है। उन्होंने बताया कि आईजीएमसी शिमला, चमियाना, टांडा और हमीरपुर सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में काम किया गया है। सरकार रोबोटिक सर्जरी को भी बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, चमियाना सहित चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाने, स्टाफ नर्सों की भर्ती करने और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी दूर करने के प्रयास किए गए हैं। सरकार मेडिकल कॉलेजों में ऑटोमेशन लैब स्थापित की जा रही है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक आधुनिक और प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि सोलन और कुल्लू सहित अन्य अस्पतालों में एमआरआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लक्ष्य रखा कि वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो।
ओपीएस पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से लिए गए अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि पेंशन कर्मचारियों के बुढ़ापे की सुरक्षा से जुड़ा विषय है और सरकार चुनावी लाभ-हानि के बजाय अपनी प्रतिबद्धता के आधार पर फैसले लेती है।
सुक्खू ने कहा कि आर्थिक दबाव के बावजूद कर्मचारियों के बकाया भुगतान करने के प्रयास किए गए हैं। सरकार ने उपलब्ध संसाधनों के भीतर कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का सहयोग प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में अहम भूमिका निभाता है।
आरडीजी नहीं कटती तो आत्मनिर्भर बन जाता हिमाचल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने दावा किया कि यदि आरडीजी नहीं कटती, तो इस समय हिमाचल प्रदेश इसी वर्ष आत्मनिर्भर बन जाता। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रतिकूल वित्तीय हालात के बावजूद कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को देखते हुए पुरानी पैंशन योजना को लागू किया तथा भविष्य में भी इसका लाभ मिलता रहेगा।
