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भारत की सभ्यतागत विरासत ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को करेगी सुदृढ़ 

शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने संस्कृत को एक जीवंत भाषा तथा भारत के ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत मूल्यों के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में संरक्षित, प्रोत्साहित और आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राज्यपाल ने सोमवार को जम्मू में श्री कैलाख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट द्वारा आयोजित संस्कृत मास 2026 के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल अतीत की भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे एक ऐसी सशक्त ज्ञान-परंपरा के रूप में समझना चाहिए, जिसकी शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक ज्ञान दृष्टि से आज भी प्रासंगिक भूमिका है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत के विविध क्षेत्रों को बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से जोड़ने में संस्कृत ने अद्वितीय भूमिका निभाई है। उत्तर की वैदिक परंपराओं से लेकर दक्षिण की ज्ञान-परंपराओं तक, संस्कृत भारत की सभ्यतागत एकता की साझा कड़ी रही है और यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती है।

उन्होंने श्री कैलाख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने संस्कृत को पारंपरिक अध्ययन की सीमाओं से आगे ले जाकर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समाज से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं और ज्ञान-परंपराओं को दिए जा रहे महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत से जुड़े विश्वविद्यालय, शोधकर्ता और संस्थान इस ज्ञान-परंपरा को डिजिटल युग के अनुरूप विकसित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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