शिमला। शिमला कलेक्टिव (Simla Collective) के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को “पीपुल्स मैनिफेस्टो: शिमला विजन 2040” विषयक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर शिमला के भविष्य के विकास एवं नियोजन में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में उमा महाजन, माला सिंह, विपन गुप्ता, रवीन सिंह, अशोक कुमार और देवेन खत्रा शामिल रहे।
शिमला कलेक्टिव ने बताया कि यह मैनिफेस्टो करीब डेढ़ वर्ष तक चले व्यापक जनपरामर्श, सर्वेक्षण, समूह चर्चाओं तथा नागरिकों की सहभागिता के आधार पर तैयार किया गया है। इस प्रक्रिया में लगभग 1,500 नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, वरिष्ठ नागरिकों तथा विभिन्न हितधारकों ने सक्रिय रूप से अपने सुझाव दिए। 2 जुलाई 2026 को गैएटी थियेटर में आयोजित बहु-हितधारक परिचर्चा में भी शिमला के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
ज्ञापन में शिमला के पर्यावरण संरक्षण, वहन क्षमता (Carrying Capacity), जल संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, हरित क्षेत्रों की सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन, पैदल यात्रियों के अनुकूल आधारभूत संरचना तथा आपदा-सुरक्षित एवं सहभागी शहरी नियोजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि “पीपुल्स मैनिफेस्टो” को शिमला के भावी विकास और नियोजन प्रक्रियाओं में नागरिकों के रचनात्मक योगदान के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संबंधित विभागों को प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही राज्य सरकार, नगर निगम, विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज के बीच नियमित संवाद एवं जनपरामर्श की संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की गई।
शिमला कलेक्टिव का कहना है कि शिमला जैसे पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील पहाड़ी शहर का भविष्य केवल आधारभूत ढांचे के विस्तार से सुरक्षित नहीं हो सकता, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जनसहभागिता, पारदर्शी प्रशासन और वैज्ञानिक नियोजन के समन्वय से ही शहर का सतत, सुरक्षित और समावेशी विकास संभव है।
