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लेह में ‘विश्व शांति और भारतीय दर्शन’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को किया संबोधित 

कहा – विकसित भारत-2047 के लिए भारतीय मूल्यों से जुड़ी तकनीकी उत्कृष्टता आवश्यक 

शिमला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक मूल्य और आध्यात्मिक परम्पराएँ आधुनिक विश्व के समक्ष उपस्थित अनेक चुनौतियों के समाधान का मार्ग प्रस्तुत करती हैं। भारतीय चिंतन संतुलन, सह-अस्तित्व, करुणा और समरसता का संदेश देता है, जो विश्व शांति और मानव कल्याण की आधारशिला बन सकता है। वे लेह स्थित लद्दाख विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “विश्व शांति और भारतीय दर्शन : वैश्विक शांति एवं सांस्कृतिक मूल्यों में भारत की भूमिका” को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं हिमालय परिवार के संरक्षक डॉ. इन्द्रेश कुमार, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई, प्रो. परमजीत सिंह गिल, लद्दाख विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा सहित अनेक शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।  

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय दर्शन मानव जीवन और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग दिखाता है तथा विश्व को स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत ने सदैव विजय या वर्चस्व के स्थान पर सार्वभौमिक कल्याण का संदेश दिया है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे आदर्श केवल दार्शनिक अवधारणाएँ नहीं हैं, बल्कि शांतिपूर्ण, समावेशी और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की व्यावहारिक आधारशिला हैं। 

राज्यपाल ने लद्दाख को आध्यात्मिकता, शांति और सांस्कृतिक समरसता की भूमि बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र सदियों से बौद्ध दर्शन, आध्यात्मिक चेतना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत यह दर्शाती है कि विविधता, परस्पर सम्मान और सहयोग के माध्यम से शक्ति का स्रोत बन सकती है। 

राज्यपाल ने विकसित भारत-2047 के संकल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र नहीं होगा, बल्कि तकनीकी रूप से उन्नत, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण राष्ट्र होगा।  युवाओं का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे भारत की सभ्यतागत विरासत से प्रेरणा लें तथा राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय जागरूकता और मानव कल्याण के प्रति समर्पण की भावना विकसित करें। 

राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी में विश्व शांति, भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों पर होने वाले विचार-विमर्श से सार्थक सुझाव सामने आएंगे, जो राष्ट्र निर्माण तथा वैश्विक सद्भाव को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर, हिमालय परिवार के संरक्षक डॉ. इन्द्रेश कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की सनातन सभ्यतागत चेतना विश्व शांति, सामाजिक समरसता और सतत विकास के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने तथा युवाओं को मूल्य-आधारित नेतृत्व, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। 

By admin

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