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शिमला। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) की राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए हिम बस कार्ड को 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य किए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की है। समिति का आरोप है कि यदि निर्धारित तिथि तक कार्ड नहीं बनाया गया तो महिलाओं को बस किराए में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट समाप्त कर दी जाएगी, जो गरीब, मजदूर और किसान महिलाओं के हितों के खिलाफ है।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक में इस मामले को गंभीरता से लिया गया। बैठक में कहा गया कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। उन्होंने कहा कि दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिला, जो दिनभर काम करने के बाद अपने परिवार के लिए राशन जुटाती है, उसके लिए अलग से कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं है। कई ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं को तो यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हिम बस कार्ड क्या है और इसे कैसे बनवाया जाए।

उन्होंने कहा कि कहा कि जब प्रदेश में पहले से ही महिलाओं को बस किराए में 50 प्रतिशत की रियायत मिल रही है, तो उसे समाप्त करने की बजाय सरकार को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करना चाहिए। बंद किए गए बस रूटों की बहाली, नए रूटों का संचालन और पर्याप्त सरकारी बसों की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने निजी बस संचालकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी बसों की संख्या बढ़ती जा रही है और कई स्थानों पर मनमाने ढंग से किराया वसूला जाता है। बसों को अधिक सवारियों से भरना, निर्धारित समय का पालन न करना, तेज आवाज में स्टीरियो बजाना तथा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी शिकायतें आम हैं।

समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और राज्य सचिव फालमा चौहान ने जिला कांगड़ा के ज्वालाजी, नगरोटा वांगबा और थुरल, हमीरपुर के हमीरपुर तथा सुजानपुर बस अड्डों और मंडी बस अड्डे पर निजी बसों की अधिकता का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि परिवहन विभाग ने कई ग्रामीण रूट बंद कर निजी बस संचालकों को सौंप दिए हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी महिला को सीमित रूट पर रियायत मिल भी जाए तो वह अपने आप को भाग्यशाली समझेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिम बस कार्ड की अनिवार्यता सरकार के लिए राजस्व जुटाने का माध्यम बन सकती है और इससे वास्तविक लाभार्थियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिवहन सेवाओं के निजीकरण की प्रक्रिया तेज हुई है, जो भविष्य में आम जनता के लिए चिंता का विषय बनेगी। उन्होंने प्रदेश की महिलाओं से अपील की कि वे हिम बस कार्ड न बनवाएं और इस निर्णय का विरोध करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो 7 मार्च को पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और परिवहन विभाग की होगी। 

By admin

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