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शिमला। माकपा के कामगार संगठन ‘सीटू’ का 56वां स्थापना दिवस किसान मजदूर भवन, कैथू शिमला में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा द्वारा झंडा फहराने के साथ हुई। इस मौके पर आयोजित सेमिनार को विजेंद्र मेहरा, बालक राम और विवेक कश्यप ने संबोधित किया, जबकि संचालन दलीप सिंह, नोख राम, पूर्ण चंद, निशा, दर्शन लाल, राकेश कुमार, रंजीव कुठियाला, भूप सिंह और शिव राम ने किया।

सेमिनार में विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की। वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने वाले हैं। इन कोडों को निरस्त करने, न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए करने, आउटसोर्स, ठेका, कैजुअल, टेंपररी, मल्टी टास्क कर्मचारियों को नियमित करने, मनरेगा के लिए बजट बढ़ाने और इसके तहत मजदूरों को न्यूनतम वेतन देने जैसी मांगों को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने लेबर कोड वापस नहीं लिए तो इसका गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इन कोडों के लागू होने से लगभग 70 फीसदी उद्योग और 74 फीसदी मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनके अधिकार खत्म हो जाएंगे।

सभा में यह भी कहा गया कि 9 जुलाई को मजदूरों और किसानों की संयुक्त राष्ट्रव्यापी हड़ताल आयोजित की जाएगी, जिसमें भूमिहीनों को जमीन देने, ढारों को नियमित करने और जबरन बेदखली रोकने की मांगें शामिल होंगी।

सेमिनार में मांग की गई कि आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, मजदूरों को ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई की पूरी सुविधा दी जाए, ओपीएस को बहाल किया जाए और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।

कार्यक्रम में महंगाई, बेरोजगारी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बिगड़ती हालत, पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, मनरेगा में 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी और 200 कार्य दिवस सुनिश्चित करने, अग्निपथ योजना के खिलाफ आंदोलन, और विभिन्न बोर्ड व निगमों के कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसी अनेक मांगों को लेकर सरकार की नीतियों का विरोध किया गया।

सभा का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मजदूर और किसान एकजुट होकर केंद्र सरकार की नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन खड़ा करेंगे।

By admin

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