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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में बस किरायों में की गई भारी वृद्धि के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के राज्य सचिव संजय चौहान ने सरकार के इस निर्णय को जनविरोधी करार देते हुए तत्काल इसे वापिस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किराया वृद्धि वापिस नहीं ली, तो पार्टी आम जनता को साथ लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।

संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने पहले न्यूनतम बस किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया, जो कि सीधे तौर पर 100 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके बाद साधारण बसों के किराए में फिर से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई, जिससे मैदानी क्षेत्रों में किराया 1.40 रुपये से बढ़कर 1.60 रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.19 रुपये से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है। इसके अलावा, स्कूल बसों के मासिक पास किराए में भी अप्रत्याशित वृद्धि की गई है। जहां अक्टूबर 2024 तक 0-5 किलोमीटर के लिए मासिक किराया 600 रुपये था, उसे अब 1800 रुपये कर दिया गया है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि है। कुछ मामलों में तो छात्रों से प्रति दिन लिए जाने वाले किराए से भी दोगुना मासिक किराया वसूला जा रहा है।

माकपा राज्य सचिव ने कहा कि यह निर्णय आम जनता खासकर मजदूर, किसान, छात्र, कर्मचारी और महिलाओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा। रोजाना सफर करने वालों के लिए यह किराया वृद्धि उनके मासिक बजट को बुरी तरह प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में परिवहन का मुख्य माध्यम बस सेवा है और इसके महंगा हो जाने से आम आदमी की जीवनशैली पर सीधा असर पड़ेगा। 

संजय चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार भी केंद्र की मोदी सरकार की तरह नवउदारवादी नीतियों को अपना रही है और सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर मुनाफे वाले रूट निजी बस ऑपरेटरों को दे दिए गए हैं, जबकि एचआरटीसी पर घाटे वाले रूटों का बोझ डाल दिया गया है। वर्तमान में एचआरटीसी के पास सिर्फ 3150 बसें और 2573 रूट हैं, जबकि निजी ऑपरेटरों की करीब 8300 बसें चल रही हैं।

संजय चौहान ने कहा कि किराया वृद्धि से शिमला जैसे शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या और विकराल हो जाएगी, क्योंकि लोग निजी वाहनों की ओर रुख करेंगे। इससे लगभग 500 से अधिक अतिरिक्त वाहन सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार कल्याणकारी राज्य की अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किराया वृद्धि को तुरंत रद्द करे और एचआरटीसी को मजबूती प्रदान कर जनता को सस्ती, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सेवा उपलब्ध कराए। साथ ही, दुनिया भर के उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि कई देशों में परिवहन सेवाओं का निजीकरण विफल साबित हुआ है और अब सार्वजनिक क्षेत्र को पुनः प्राथमिकता दी जा रही है। 

By admin

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