जुब्बल। हिमाचल किसान सभा व सेब उत्पादक संघ के आह्वान पर सोमवार को जुब्बल तहसील कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया। ब्लॉक व तहसील स्तर पर तय कार्यक्रम के तहत आयोजित इस धरने में अलग-अलग गांवों से आए बागवान, महिलाएं, पुरुष, युवा व बुजुर्ग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी लगभग चार घंटे तक कार्यालय के बाहर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में डटे रहे और सरकार से तुरंत समाधान की मांग की।
धरना प्रदर्शन भूमि से बेदखली, घरों की तालाबंदी, और वन संरक्षण अधिनियम 1980 में संशोधन व वन अधिकार अधिनियम 2006 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांगों के समर्थन में किया गया। इससे पहले, किसानों ने 11 फरवरी को ज्ञापन सौंपा था और 20 मार्च को विधानसभा मार्च भी निकाला था। धरने के दौरान सेब उत्पादक संघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य संजय चौहान, जुब्बल इकाई के संयोजक जय सिंह जैहटा, सचिव कृष्ण कुमार, अध्यक्ष संजय कुमार तथा अन्य सदस्यों ने संयुक्त रूप से प्रभावित परिवारों और भू-अकांक्षी जनों की मांगों से संबंधित ज्ञापन तहसील कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया।
धरने में प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें ज़मीन से बेदखली व घरों की तालाबंदी पर तत्काल रोक लगाने की मांग प्रमुख रही। इसके अलावा, किसानों के कब्जे वाली पांच बीघा तक की भूमि को नियमित करने, केंद्र सरकार द्वारा वन संरक्षण अधिनियम 1980 में संशोधन कर राज्य सरकार को आपदा प्रभावितों और लघु व सीमांत किसानों को दस बीघा तक जमीन आबंटित करने का अधिकार देने तथा प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम 2006 को प्रभावी रूप से लागू करने की मांगें शामिल रहीं।
प्रदर्शनकारियों ने सड़क, पनविद्युत व अन्य परियोजनाओं के तहत अधिग्रहीत जमीन का चार गुना मुआवजा देने और इन परियोजनाओं से मकानों व जमीन को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई। इसके साथ ही, बेघर गरीब व दलित परिवारों को शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा जमीन देने की मांग की गई।
हिमाचल किसान सभा व सेब उत्पादक संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की तो संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा।
