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शिमला। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 985 कंप्यूटर साइंस लेक्चरर की भर्ती का निर्णय एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय कदम है, जो राज्य में तकनीकी शिक्षा को पुनर्जीवित एवं सुदृढ़ करेगा। सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से हजारों कंप्यूटर शिक्षकों एवं व्यवसायिक शिक्षकों को लाभ मिलेगा, जिन्होंने वर्षों तक शिक्षा विभाग में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रीढ़ की हड्डी के समान काम किया है।

शर्मा ने कहा कि पिछले एक दशक से, हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षक और आईटी विषय के व्यवसायिक प्रशिक्षक शिक्षा विभाग में अपनी बेहतरीन सेवाएं देने के साथ साथ सरकारी स्कूलों के दफ्तरों का सारा कंप्यूटर का कार्य देखते आ रहे हैं  और पिछले एक दशक से अपने नियमतीकरण एवं उचित मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन शिक्षकों को लाभान्वित करने की दृष्टि से  वर्ष 2016 में, तत्कालीन सरकार द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (Information Practices) की 632 पदों  पर भर्ती  में 5 वर्षों के अनुभव को एक महत्वपूर्ण शर्त के रूप में जोड़ा गया था जिसके लिए 28  सितम्बर 2016 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे । हालांकि, यह मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा और लंबे समय तक निर्णय नहीं हो सका। जिसमे अब माननीय उच्च न्यायलय ने  5 वर्ष के अनुभव की शर्त को सही करार देते हुए इन शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है I

उन्होंने कहा कि राज्य में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए 07 मार्च 2024 को 985 कंप्यूटर साइंस लेक्चरर पदों की भर्ती को मंजूरी दी और 14 मार्च 2024 को इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय को निर्देश जारी किए। यह निर्णय सरकार की तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर टीचर और व्यवसायिक ट्रेनर मांग कर रहे हैं कि कंप्यूटर साइंस लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया में 5 वर्षों के अनुभव की शर्त को केवल सरकारी स्कूलों के कंप्यूटर शिक्षक एवं आईटी विषय के व्यवसायिक प्रशिक्षकों के अनुभव तक सीमित रखा जाए। यदि इस अनुभव को निजी शिक्षण संस्थानों या अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं में कार्यरत शिक्षकों तक विस्तारित किया जाता है, तो इससे सरकारी स्कूलों के उन शिक्षकों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने शिक्षा विभाग के नियमों के तहत वर्षों तक सेवा दी है और अपना सारा जीवन विभाग को एक आस में समर्पित कर दिया है। अन्य शिक्षक वर्गों की तरह, कंप्यूटर शिक्षक एवं व्यवसायिक प्रशिक्षकों को भी नियमित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यदि सभी शिक्षण श्रेणियों को नियमित किया जा सकता है, तो सरकार को कंप्यूटर शिक्षकों को भी समान अवसर प्रदान करने चाहिए।

शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकारी स्कूलों के आईटी शिक्षकों ने लंबे समय तक शिक्षा विभाग की नीतियों के अनुरूप कार्य किया है और राज्य सरकार की शैक्षिक योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सेवा देने वाले कंप्यूटर शिक्षकों का अनुभव अधिक प्रासंगिक एवं व्यावहारिक है, जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अन्य संस्थानों के अनुभव को शामिल करने से सरकारी स्कूलों में वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षकों के अधिकारों का हनन होगा।

सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय निश्चित रूप से हिमाचल प्रदेश में आईटी शिक्षा के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, यदि भर्ती प्रक्रिया में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के अनुभव को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यह उन शिक्षकों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने विभाग के नियमों के अंतर्गत वर्षों तक सेवा दी है। समस्त कंप्यूटर एवं आईटी विषय के व्यवसायिक शिक्षक  सरकार से निवेदन कर रहे हैं कि इस मांग को प्राथमिकता के साथ स्वीकार करते हुए भर्ती प्रक्रिया में उपयुक्त संशोधन किए जाएं, ताकि योग्य एवं पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार प्राप्त हो सके और उनके वर्षों के संघर्ष का उचित परिणाम निकल सके। 

By admin

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