शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले सीजन से सेब पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य होगा। बाहरी राज्यों पंजाब, हरियाण और दिल्ली में भी सेब 24 किलो की पैकिंग में बिके, सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी। इसके लिए राज्य सरकार की इन राज्यों की सरकारों के साथ पत्राचार शुरू हो गया है। फिर भी अगर बात नहीं बनती है तो सरकार वहां के उच्च न्यायालय से इसे लागू करवाने के लिए बाध्य करेंगे। यह बात बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शनिवार को ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर द्वारा विधानसभा में नियम-61 के तहत चर्चा के लिए लाए गए प्रस्ताव के जवाब में कही।
बागवानी मंत्री ने कहा कि अगले सीजन से टेलीस्कोपिक कार्टन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। उन्होंने कहा कि सेब वजन के हिसाब से बेचने से बागवानों को फायदा हुआ है। बागवानों को इस साल सेब के अच्छे दाम मिले हैं। उन्होंने कहा कि जिन आढ़तियों ने इन आदेशों को नहीं माना, उनसे 22 लाख रुपए तक का जुर्माना वसूला गया है। उन्होंने कहा कि टेलीस्कोपिक कार्टन का फायदा आढ़ती और लदानियों को हो रहा था। इसलिए उनकी सरकार ने सेब को वजन के हिसाब से बेचने का निर्णय लिया।
बागवानी मंत्री ने जी-20 सम्मेलन में वाशिंगटन सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी को कम किए जाने के मामले पर बात करते हुए कहा कि इससे हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को भारी नुकसान होगा। इस बीच, राठौर ने ईरान का सेब जो अफगानिस्तान के रास्ते से देश में आ रहा है, उस पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे भी बागवानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि टेलीस्कोपिक कार्टन में 2 पीस में होते हैं। उसमें 30 से 35 किलो तक सेब भरा जा सकता है। आढ़ती चाहते हैं कि पेटी में ज्यादा से ज्यादा सेब भरा जाए। इसलिए सरकार ने प्रति पेटी 24 किलो की शर्त लगाई थी। अगले सीजन से अब यूनिवर्सल कार्टन लागू होगा। यह सिंगल पीस होता है। इसमें अधिकतम 23 किलो के आस-पास सेब भरा जाएगा।
चीजें स्पष्ट नहीं, बागवान बाहर बेच रहे सेब – कुलदीप राठौर
उधर, ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने नियम-61 के तहत लाई चर्चा में कहा कि सरकार ने जो किलो के हिसाब से सेब बेचने का निर्णय लिया है इसमें कुछ चीजें स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में बागवान प्रदेश के बाहर सेब बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके क्रियान्वयन होने में समस्या आ रही है। यह संभव नहीं हो पाएगा, क्योंकि अभी भी बाजार में टेलीस्कोपिक कार्टन मौजूद है। प्रदेश के बाहर इसमें कोई भी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल का सेब पंजाब, हरियाणा, मुंबई, चेन्नई में बिकता है, लेकिन यहां पर किलो के हिसाब से सेब बिकने की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि कई आढ़तियों ने हिमाचल को छोड़ दिया है। यह गंभीर समस्या है। हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि हमेशा के लिए इस समस्या से निजात मिल जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरे प्रदेश से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को बागवानों के हितों और बागवानी का ख्याल रखना होगा। उन्होंने कहा कि ईरान का सेब भी भारत आ रहा है, इससे भी बागवानों को नुकसान हो रहा है। भारत में सेब अफगानिस्तान होकर आ रहा है और इससे हिमाचल के बगवानों को नुकसन झेलना पड़ रहा है।
उधर, ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने नियम-61 के तहत लाई चर्चा में कहा कि सरकार ने जो किलो के हिसाब से सेब बेचने का निर्णय लिया है इसमें कुछ चीजें स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में बागवान प्रदेश के बाहर सेब बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके क्रियान्वयन होने में समस्या आ रही है। यह संभव नहीं हो पाएगा, क्योंकि अभी भी बाजार में टेलीस्कोपिक कार्टन मौजूद है। प्रदेश के बाहर इसमें कोई भी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल का सेब पंजाब, हरियाणा, मुंबई, चेन्नई में बिकता है, लेकिन यहां पर किलो के हिसाब से सेब बिकने की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि कई आढ़तियों ने हिमाचल को छोड़ दिया है। यह गंभीर समस्या है। हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि हमेशा के लिए इस समस्या से निजात मिल जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरे प्रदेश से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को बागवानों के हितों और बागवानी का ख्याल रखना होगा। उन्होंने कहा कि ईरान का सेब भी भारत आ रहा है, इससे भी बागवानों को नुकसान हो रहा है। भारत में सेब अफगानिस्तान होकर आ रहा है और इससे हिमाचल के बगवानों को नुकसन झेलना पड़ रहा है।
