शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हिमाचल प्रदेश ने राज्य सरकार द्वारा संजय गुप्ता को सेवा विस्तार देकर नियमित मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया पर गंभीर चिंता और आपत्ति व्यक्त की है। सरकार द्वारा की जा रही इस कार्यवाही से सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगता है। एक ओर सरकार भ्रष्टाचार को लेकर “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मुख्य सचिव पद पर ऐसा व्यक्ति बैठाया गया है और उसके सेवा विस्तार की बात की जा रही है, जिसके खिलाफ व्यापक भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। वहीं, न्यायालय ने भी इनकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है।
सीपीआई (एम) राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि वर्तमान में माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका विचाराधीन है। इसमें 19 मई को माननीय न्यायालय ने “इंस्टीट्यूशनल इंटेग्रिटी” जैसे गंभीर प्रश्नों पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार, भारत सरकार तथा संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया है। याचिका में संजय गुप्ता के खिलाफ तीन लंबित एफआईआर के अतिरिक्त दो लंबित क्रिमिनल रेफरेंस का भी उल्लेख किया गया है, जिन पर सरकार से जवाब मांगा गया है। ऐसे समय में संबंधित अधिकारी को नियमित मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना प्रशासनिक पारदर्शिता एवं संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
संजय चौहान ने कहा कि मुख्य सचिव का पद राज्य प्रशासन का सर्वोच्च पद है, जिस पर केवल निष्पक्ष, निर्विवाद एवं उच्च नैतिक मूल्यों वाले अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए, जबकि संजय गुप्ता के विरुद्ध लंबित एफआईआर, सतर्कता एवं अन्य आरोपों से जुड़े मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
संजय चौहान ने कहा कि सीपीआई (एम) लगातार उक्त अधिकारी के कार्य व्यवहार, कार्यप्रणाली एवं प्रशासनिक निर्णयों को लेकर आवाज उठाती रही है तथा उन्हें पद से हटाने के साथ-साथ ही उनके खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की मांग भी करती रही है। उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारी का नाम पिछले दिनों चेस्टर हिल भूमि के कथित बेनामी सौदों में सुर्खियों में रहा है। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र की हिमाचल प्रदेश राज्य संचार निगम में 220/132 केवीए ट्रांसफार्मरों की लगभग 71 करोड़ रुपये की खरीद तथा एक अन्य 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लगभग 50 करोड़ रुपये के कार्य के एकल बोली के आधार पर आवंटन में गंभीर अनियमितताओं की गई हैं, जिसकी शिकायत जांच हेतू निदेशक सतर्कता, हिमाचल व मुख्य सतर्कता आयुक्त, दिल्ली को भेजी जा चुकी हैं।
चौहान ने कहा कि उक्त अधिकारी की गाड़ी से वर्ष 2009 में जांच एजेंसी द्वारा नकदी बरामद किए जाने के कारण उक्त अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था, तथा वह निलंबित भी रहा है। इस मामले का संज्ञान अब माननीय न्यायालय द्वारा उक्त आदेशों में लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली एवं गंभीर आरोपों के बावजूद उक्त अधिकारी को नियमित मुख्य सचिव बनाया जाना जनविश्वास एवं सुशासन की भावना के विपरीत होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि संजय गुप्ता को नियमित मुख्य सचिव नियुक्त करने व सेवा विस्तार की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा संस्थागत शुचिता एवं प्रशासनिक नैतिकता को लेकर व्यक्त टिप्पणियों को गंभीरता से ध्यान में रखते हुए उन्हें तत्काल मुख्य सचिव के पद से हटाया जाए और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए।
