विधानसभा अध्यक्ष ने जयपुर में पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक में लिया हिस्सा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि लोकतंत्र में समिति प्रणाली “मिनी सदन” की भूमिका निभाती है और इसे और सशक्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली न केवल सदन की कार्यक्षमता बढ़ाती है, बल्कि समय की बचत करते हुए विशेषज्ञता आधारित निर्णयों को भी प्रोत्साहित करती है। वे मंगलवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित “कांस्टिट्यूशन क्लब” में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की एक दिवसीय बैठक में बोल रहे थे।
लोकसभा द्वारा गठित इस समिति की यह दूसरी बैठक थी। इसकी अध्यक्षता मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर ने की। इस बैठक में कुलदीप पठानिया के अलावा उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उड़ीसा विधानसभा की अध्यक्षा सूरमा पाढ़ी तथा सिक्किम विधानसभा अध्यक्ष मिंगमा नोर्बू शेरपा सहित सभी सदस्य उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में कुलदीप पठानिया ने कहा कि समिति प्रणाली किसी भी लोकतांत्रिक विधायिका का अहम हिस्सा है, जो संसद और विधानमंडलों के कार्यों को अधिक प्रभावी, विशेषज्ञतापूर्ण और जवाबदेह बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में विधेयकों की गहन जांच, सरकारी नीतियों की समीक्षा और कार्यपालिका पर नियंत्रण स्थापित करने में समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पठानिया ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
पठानिया ने समिति प्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि समितियों की सिफारिशों को अधिक प्रभावी और बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए। वर्तमान में ये रिपोर्टें केवल परामर्शात्मक होती हैं, लेकिन यदि सरकार को निर्धारित समय सीमा में जवाब देना अनिवार्य किया जाए, तो उनकी उपयोगिता बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से विभागीय स्थायी समितियों के पास भेजा जाना चाहिए, जिससे कानून अधिक व्यवहारिक और जनहितकारी बन सकें। साथ ही समितियों को विशेषज्ञ सलाहकार, शोधकर्ता और डेटा विश्लेषक उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता बताई, ताकि निर्णय तथ्यपरक और गुणवत्तापूर्ण हों।
पठानिया ने समिति सदस्यों के लिए नियमित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और अंतरराष्ट्रीय संसदीय अनुभवों के अध्ययन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समितियों की बैठकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि कार्य अधिक प्रभावी हो सके।
पारदर्शिता और तकनीकी सुधार पर जोर
कुलदीप पठानिया ने समिति कार्यवाही में पारदर्शिता और जनसहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे लोकतंत्र अधिक सहभागी बन सके। इसके अलावा, समिति अध्यक्षों की नियुक्ति में दलीय राजनीति से ऊपर उठकर योग्यता और निष्पक्षता को प्राथमिकता देने की बात कही। डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए उन्होंने ऑनलाइन बैठकें, डिजिटल दस्तावेज प्रबंधन, डेटा विश्लेषण और लाइव अपडेट जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने का सुझाव दिया, जिससे समिति कार्य अधिक आधुनिक और तेज हो सके।
पठानिया ने कहा कि समिति प्रणाली भारतीय लोकतंत्र की कार्यकुशलता और जवाबदेही का मजबूत आधार है। यदि इसे सशक्त बनाने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जाएं, तो यह विधानमंडलों को अधिक प्रभावशाली, उत्तरदायी और जनकेन्द्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बैठक से पूर्व सभी सदस्यों ने औषधीय पौधशाला तथा राजस्थान विधानसभा द्वारा निर्मित संग्रहालय का भ्रमण किया और परिसर में लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। बैठक शुरू होने से पहले राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभापति और अन्य सदस्यों का पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं सम्मान किया।
