जनविरोधी फैसलों के खिलाफ तेज होगा संघर्ष – चौहान
राजस्व घाटा अनुदान बहाल करने, स्कूल-कॉलेज बंद करने के निर्णय वापस लेने और पेट्रोल-डीजल राशनिंग अधिसूचना रद्द करने की मांग
शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक शिमला स्थित पार्टी कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. ओंकार शाद ने की, जबकि पार्टी केंद्रीय सचिवालय सदस्य विक्रम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में राज्य सचिव संजय चौहान ने राजनीतिक एवं संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा केंद्रीय कमेटी की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और कृषि संकट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। माकपा ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों की आलोचना करते हुए ईरान, फिलिस्तीन, वेनेजुएला और क्यूबा के खिलाफ की जा रही सैन्य कार्रवाइयों की निंदा की। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं पर केंद्र सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। पार्टी के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जिससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी है तथा भारत भी इससे अछूता नहीं रहा।
माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने बैठक में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से लाखों लोगों को मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने और हिमाचल प्रदेश में भी लोगों को वोट के अधिकार की रक्षा के लिए संगठित करने का निर्णय लिया है।
आर्थिक संकट पर चिंता
चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की नवउदारवादी नीतियों के कारण प्रदेश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पार्टी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जिससे राज्य पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा। पार्टी ने दावा किया कि प्रदेश का कुल कर्ज एक लाख आठ हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व की कमी की भरपाई के लिए सरकार आम जनता पर करों का बोझ बढ़ा रही है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पेयजल और बिजली जैसे क्षेत्रों में बजट कटौती की जा रही है। माकपा ने केंद्र सरकार से आरडीजी को तुरंत बहाल करने की मांग की।
स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का विरोध
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश में स्कूलों और कॉलेजों के बंद या विलय किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से अब तक लगभग 1,500 स्कूल बंद या मर्ज किए जा चुके हैं और हाल ही में 10 कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। माकपा ने इन फैसलों को शिक्षा विरोधी बताते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की।
बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध
संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने, बिजली पर विभिन्न प्रकार के सेस लगाने तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों का भी बैठक में विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा है और भविष्य में मुफ्त बिजली तथा सब्सिडी समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया है।
कृषि और बागवानी संकट पर जताई चिंता
चौहान ने कहा कि बैठक में किसानों और बागवानों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि उर्वरकों की बढ़ती कीमतों, सब्सिडी में कटौती और फसलों के उचित दाम न मिलने से कृषि एवं बागवानी संकट गहराया है। हाल ही में हुई ओलावृष्टि और भारी वर्षा से सेब, नाशपाती, प्लम, खुमानी, मटर, गेहूं और गोभी की फसलों को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल सर्वे कर किसानों को मुआवजा देने की मांग की गई।
माकपा ने मांग की कि मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत बागवानों का लंबित भुगतान शीघ्र किया जाए और केंद्र सरकार इस योजना के बजट में की गई कटौती वापस ले।
पेट्रोल-डीजल राशनिंग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
पार्टी ने केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 11 जून 2026 को जारी पेट्रोल और डीजल की राशनिंग संबंधी अधिसूचना को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। माकपा ने चेतावनी दी कि यदि अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो किसानों को संगठित कर पेट्रोल पंपों पर प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
राज्य कमेटी ने दूध उत्पादकों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से घोषित दरों पर दूध खरीद सुनिश्चित करने और समय पर भुगतान करने की मांग की। साथ ही प्रदेश में अधिक दूध चिलिंग प्लांट स्थापित करने की आवश्यकता भी जताई।
पार्टी ने भूमिहीन किसानों, दलितों और आपदा प्रभावित परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन की मांग करते हुए कब्जे वाली भूमि के नियमितीकरण संबंधी आंदोलनों का समर्थन किया।
सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की अपील
चौहान ने कहा कि माकपा ने प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली घटनाओं की निंदा करते हुए जनता, सामाजिक संगठनों और प्रगतिशील विचारों वाले लोगों से ऐसी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाईचारा, शांति और सौहार्द बनाए रखना समय की आवश्यकता है। बैठक में राज्य कमेटी ने निर्णय लिया कि आने वाले दिनों में केंद्र और प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूरों, किसानों और आम जनता को संगठित कर संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
