शिमला। संयुक्त किसान मंच के बैनर तले सोमवार को राज्यभर में किसानों-बागवानों ने सरकार की किसान-बागवान विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। बागवानों ने कार्टन पर जीएसटी को 12 फीसदी से 18 फीसदी करने, बागीचों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के महंगा होने और उस पर सब्सिडी समाप्त करने और सेब में प्रयोग होने वाली ट्रे के दामों में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
शिमला जिले के रोहड़ू, ठियोग समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। रोहड़ू में किसानों व बागवानों के विभिन्न संगठनों ने सरकार की किसान व बागवान विरोधी नीतियों के विरुद्ध धरना प्रदर्शन किया। बागवानों ने कहा कि सरकार उन पर टैक्स थोप कर उत्पादन लागत बढ़ा रही है और उनको इनके उत्पाद की उचित कीमत नहीं मिल रही है। बागवानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने कोई कदम न उठाया तो सरकार की इन बागवान विरोधी नीतियों के विरुद्ध 20 जुलाई को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
बागवान नेता संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने सेब में इस्तेमाल होने वाले कार्टन पर जीएसटी की दर को 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया है। इससे लागत और बढ़ गई है और इसकी मार बागवानों पर पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि खाद, फफूंदीनाशक व कीटनाशक दवाओं के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ-साथ सेब की पेटियों में इस्तेमाल होने वाली ट्रे की की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है। इसलिए सरकार को इस पर तुरंत सब्सिडी देनी चाहिए।
चौहान ने कहा कि उनकी मांग है कि हिमाचल के बागवानों के लिए कश्मीर की तर्ज पर मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) लागू की जाए। उन्होंने इसके तहत यहां पर भी बागवानों को ए ग्रेड सेब के 60 रुपए, बी ग्रेड सेब के 44 रुपए और सी ग्रेड सेब के 24 रुपए प्रति किलो मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि एचपीएमसी और हिमफैड द्वारा खरीदे गए सेब का बकाया भुगतान भी तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि सेब सीजन शुरू हो गया है और खरीददार एपीएमसी एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं और बागवानों को तय समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा। इसलिए राज्यभर में एपीएमसी एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए और बागवानों को तय समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
