शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रदेश में रसोई गैस सिलेंडरों की कथित कमी तथा पेट्रोल और डीज़ल की राशनिंग एवं पाबंदी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी ने केंद्र और प्रदेश सरकार से आम लोगों, किसानों और बागवानों की परेशानियों को देखते हुए तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है।
माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर लगाई गई शर्तों के कारण हिमाचल प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की नियमित आपूर्ति बाधित हो रही है। उनका आरोप है कि पिछले लगभग तीन महीनों से ग्रामीण इलाकों में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को गैस एजेंसियों तक पहुंचने के लिए 500 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई बार उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
चौहान ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और वन क्षेत्रों में लकड़ी काटने पर प्रतिबंध होने के कारण लोगों के पास खाना पकाने का कोई अन्य व्यवहारिक विकल्प नहीं है। उन्होंने सरकार से प्रदेश में रसोई गैस की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 11 जून 2026 को जारी अधिसूचना के बाद पेट्रोल पंपों पर बोतलों और कैनों में ईंधन दिए जाने पर रोक लगा दी गई है, जिससे किसानों और बागवानों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश के किसान और बागवान खेती-बाड़ी से जुड़े कई कार्यों के लिए पावर टिलर, स्प्रे मशीन, घास और लकड़ी काटने की मशीनों के अलावा ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग मशीनों का उपयोग करते हैं, जो पेट्रोल और डीज़ल से संचालित होती हैं। ऐसे में ईंधन उपलब्ध न होने से कृषि एवं बागवानी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। चौहान ने सरकार से मांग की कि रसोई गैस की आपूर्ति को तत्काल सामान्य किया जाए। साथ ही किसानों और बागवानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री पर लगाई गई पाबंदियों में आवश्यक ढील प्रदान की जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
