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शिमला। कांग्रेस कमेटी जुब्बल-नावर-कोटखाई के सोशल मीडिया संयोजक अक्षय सिंह नैंटा ने ओलावृष्टि से हुए नुक़सान का सही आंकलन कर किसानों को उचित मुआवज़ा देने की सरकार से मांग की है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बागवानों के उत्पाद के विपणन के लिए घर-द्वार तक सुविधा उपलब्ध करवाई जाए और देश के विभिन्न राज्यों के सेब खरीददारों (लदानी) से समय रहते संपर्क स्थापित कर उन्हें पंजीकृत करवाकर प्रदेश में आमंत्रित किया जाए। उनका कहना था कि सेब ख़रीद व विपणन में विशेषकर शिमला, सोलन और कुल्लू एपीएमसी की प्रमुख भूमिका होगी। एचपीएमसी को सुदृढ कर सेब ख़रीद व विपणन में शामिल किया जाए जिससे किसान लाभान्वित हो सकें। 
नैंटा ने कहा कि सेब सीजन के लिए अभी तक सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पेटियों और ट्रे का मूल्य बागवानों से बहुत ज्यादा वसूला जा रहा है। पिछले साल ट्रे का रेट 4 .85 रूपए था, जो इस वर्ष 5.45 रूपए कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रेट तय करके बागवानों को ट्रे और पेटियां उपलब्ध करवाने को न कोई डिपो खोले गए हैं और और किसी माध्यम से ये उपलब्ध करवाई जा रही है। वहीं नेपाल से आने वाली लेबर के लेकर भी कोई प्रबंध अभी तक हुआ है। उनका कहना था कि सेब सीज़न को मात्र डेढ़ माह का समय शेष है। ऐसे में समय रहते बागव़ानों की समस्याओं का समाधान किया जाएं, ताकि 5 करोड़ रुपये की आर्थिकी को बचाया जा सके। 
नैंटा ने कहा कि सरकार ने गत दिनों पहले पड़ोसी देश नेपाल से श्रमिकों को लाने की बात की थी। जिसको लेकर समय रहते केंद्र के सहयोग से मामलें को उठाकर इस निर्णय को अमलीजामा पहनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सेब बहुल क्षेत्रों में सीमावर्ती राज्यों से श्रमिकों को लाने के लिए ई-पास बनवाने के लिए उपमंडलाधिकारी तथा तहसीलदारों को अधिकृत किया जाएं, ताकि बाग़वान मजदूरों संबंधित औपचारिकताएं स्थानीय स्तर पर ही निपटा सकें। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि प्रदेश के प्रमुख प्रवेश द्वार परवाणु, पौंटा-साहिब व कुड्डू में मज़दूर सहायता केंद्र खोलें जाएं। वहीं, कोरोना महामारी की आड़ में बागवानों को पैकेजिंग सामग्री में की गई बढोतरी को देखते हुए में सरकार पूर्व की तरह एचपीएमसी व हिमफैड के माध्यम से बागवानों को नियंत्रित दरों पर पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करें। 

30 रुपए हो सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य
नैंटा ने सरकार से मंडी मध्यस्था योजना के तहत खरीदे जाने वाले सेब का कम से कम मूल्य 30 प्रति किलो करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में प्रदेश सरकार ने 20 रूपए किलो के हिसाब से लाहौल-स्पीति का सेब खरीदा था। उस समय भारी हिमपात हुआ था और जिसको सरकार ने एक त्रासदी बताया था। ऐसे में सरकार को लाहौल स्पीति की तर्ज पर मंडी मध्यस्था योजना के तहत 30 रूपये प्रति किलो सेब का समर्थन मूल्य करना चाहिए, ताकि इस कोरोना त्रासदी में बागवानों को राहत मिल सके।

By admin

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