शिमला। हिमाचल किसान सभा के तत्वावधान में सेब के मुद्दे पर फसल आधारित संगठन “सेब उत्पादक संघ” का गठन किया गया है। इस बैठक में 45 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। संघ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सोहन ठाकुर को सौंपी गई, जबकि सचिव प्रेम चौहान को चुना गया।
हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि आज देश के साथ-साथ प्रदेश में भी बागवानी और खास तौर पर सेब पर भयंकर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। हालांकि सेब में भी अन्य फसलों की तरह उत्पादन से लेकर मार्किटिंग तक तमाम स्तर पर समस्याओं का अंबार है, लेकिन ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते आयातित सेब के कारण हिमाचल के सेब पर जबरदस्त संकट बढ़ गया है। डॉ. शाद ने नव उदारवादी नीतियों का हवाला देते हुए सेब पर संकट गहराया है।
बैठक में आए प्रतिनिधि बागवानों में से सुरेंद्र चौहान, शेर सिंह, त्रिलोक मेहता, अजय दुल्टा, सोहन ठाकुर, सुखदेव चौहान, ईश्वर चौहान, शिव सिंह चंदेल, ताराचंद चौहान, केपी नेगी, आदि ने एपीएमसी के स्तर पर ठोस हस्तक्षेप करने, मार्किटिंग में किसानों की लूट रोकने, सरकार द्वारा बागवानी के उपकरणों पर बंद की गई सब्सिडी आदि को लेकर ठोस सुझाव रखे।
किसान सभा के पूर्व महासचिव एवं विधायक राकेश सिंघा ने सेब पर मंडरा रहे खतरे को न भांपने व बागवानों के संगठित न होने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने किसानों द्वारा अपने तजुर्बों से सीख लेते हुए आज फसल आधारित संगठन के निर्माण को किसान-बागवान के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। सिंघा ने बताया कि आज सरकार की गलत नीतियों के चलते सेब किसी भी सूरत में लाभकारी नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि यह हमला सरकार की गलत नीतियों का समय समय पर कभी नवउदारवाद के रूप में, कभी एसईजैड के रूप में, कभी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के रूप में, कभी बड़े पूंजीपति के साईलोज खोलने के रूप में, कभी कृषि कानूनों के रूप में किसानों पर किया जाता रहा है। उनका कहना था कि इसका हल केवल किसानों के संगठित होकर संयुक्त रूप से क्षेत्र, भाषा, लिंग, जाति, धर्म के भेद को छोड़कर एकजुट होकर संघर्ष करके ही है।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान पुंडीर ने कहा कि इस बैठक में सेब उत्पादक संघ की नवनिर्वाचित कमेटी ने अप्रैल माह में खण्ड स्तर सेब की समस्याओं पर धरने प्रदर्शन करने का निर्णय लिया तथा कहा कि बैठकों के माध्यम से सदस्यता की रूपरेखा तैयार की जाएगी। बैठक में तय हुआ कि सेब उत्पादक संघ का संगठन किसान सभा से सम्बद्ध होगा, जिसकी सदस्यता 5 रुपए होगी। इसी के साथ संयुक्त किसान मंच की तर्ज पर सेब उत्पादक संघ भी 28 मार्च को अखिल भारतीय हड़ताल में हिस्सेदारी करते हुए खण्ड स्तर पर प्रदर्शन करेगा।
