शिमला। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव महेश्वर चौहान ने प्रदेश में हाल ही में भारी ओलावृष्टि और बेमौसमी बर्फ़बारी से सेब की फसल और बागीचों के नुक़सान का तुरंत आकलन करने की सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा है कि साथ ही इस प्राकृतिक आपदा से हुई भारी क्षति का बागवानों को उचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए।
चौहान ने रविवार को यहां कहा कि इस बर्फ़बारी/ओलावृष्टि का हमला किसी प्राकृतिक त्रासदी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाग़वान, हिमाचल के आर्थिकी का मज़बूत आधार है और इस आपदा ने उनकी कमर तोड़कर रख दी है तथा वे आज अपनेआप को असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के बड़े किसान नेताओं और किसान संगठनों ने प्रदेश के बागवानों के हालात पर चिंता जताई है, लेकिन प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार के सिर पर जूं नहीं रेंग रही।
महेश्वर चौहान ने कहा कि सरकार तुरंत इस नुक़सान के आकलन के लिए टीमें गठित की जाए। साथ ही वानिकी एवं बाग़वानी विश्वविद्यालय नौणी के विशेषज्ञ इन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके इस नुक़सान की भरपाई के लिए कोई नीतिगत योजना/सुझाव दे, ताकि बागवानों को कुछ राहत पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार फसल बीमा योजना केसीसी धारकों से काटी गई किश्तों की समीक्षा करे। यही नहीं सरकार, बीमा कंपनियों और बैंकों से चर्चा करके सुनिशचित करे कि बाग़वानों को इस नुक़सान का मुआवज़ा मिले।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को ग़ौर करना चाहिए की जहां पर बागवानों ने ”ऐंटी हेल नेट्स” इस्तेमाल की है, वहां पर इस आपदा में ज़्यादा नुक़सान हुआ है। इसलिए यह अतिआवश्यक है की इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी ध्यान दिया जाए और नीतिगत योजना के निर्धारण की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश का बाग़वानी क्षेत्र बहुत बुरे दौर से गुज़र रहा है और इसे आर्थिक मदद से मज़बूत करने की ज़रूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषम स्थिति को देखते हुए सरकार मंडी मध्यस्थता योजना के तहत एचपीएमसी द्वारा की गई सेब की ख़रीद का लंबित भुगतान तुरंत प्रभाव से ज़ारी करे।
