शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की शिमला जिला कमेटी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले दिनों से चल रहे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। जिला कमेटी का कहना है कि जिस प्रकार से विश्वविद्यालय के उपकुलपति व प्रशासन आज आरएसएस के दबाव में कार्य कर रहे हैं, पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। माकपा के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि पिछले कल पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर विश्वविद्यालय में उपकुलपति के द्वारा जो कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसके मुख्य अतिथि प्रदेश के उपराज्यपाल थे, इसमें केवल आरएसएस से संबंधित लोगो को ही आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में न तो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों व छात्रों को आमंत्रित किया गया था और न ही इनको इस कार्यक्रम में प्रवेश की भी इजाजत दी गई थी। उन्होंने कहा कि सबसे निंदनीय व शर्मनाक बात यह है कि यह सरकारी कार्यक्रम था और इसमें मीडिया को प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के उपकुलपति व प्रशासन इस प्रकार का रवैया बिल्कुल असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक है। चौहान ने कहा कि उपकुलपति ने यह कार्यक्रम केवल आरएसएस का कार्यक्रम बनाकर रख दिया था। यह आज बिल्कुल भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि माकपा मांग करती है कि सरकार विश्वविद्यालय के उपकुलपति व प्रशासन की इस असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को देखते हुए तुरंत इनके विरुद्ध कार्रवाई कर अपना संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे। उन्होंने कहा कि जबसे प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी है और वर्तमान उपकुलपति की नियुक्ति हुई है, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आरएसएस का हस्तक्षेप अत्यधिक बढ़ा है। उपकुलपति की नियुक्ति भी सरकार द्वारा आरएसएस के दबाव में ही की गई है और यह नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में आरएसएस के दबाव में पिछले दरवाजे से भर्तियां की जा रही हैं। विश्वविद्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार फैलाने के आरोप भी लग रहे हैं। इससे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की साख पर बट्टा लगा है और छात्र समुदाय व अन्य वर्ग भी इसका विरोध कर रहे हैं। माकपा नेता ने कहा कि उपकुलपति व विश्विद्यालय प्रशासन निरन्तर इस विरोध व आंदोलन को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठा रहे हैं। आज विश्वविद्यालय में छात्र व कर्मचारी उपकुलपति की इस असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक कार्यप्रणाली के विरुद्ध निरन्तर आवाज़ उठा रहे हैं।
