शिमला। हिमाचल किसान सभा ने राज्य सरकार द्वारा सेब, आम व नींबू के दाम में की गई एक रुपए की वद्धि को किसान-बागवानों के साथ कोरा मजाक करार दिया है। किसान सभा इसके खिलाफ 20 जुलाई को खण्ड स्तर पर आन्दोलन करेगी तथा सरकार के इस प्रकार के किसान-बागवान विरोधी रवैये का विरोध करेगी। किसान सभा ने सभी किसान-बागवानों से भी अपील की कि सरकार के इस प्रकार के ठगी एवं भ्रमित करने वाले निर्णयों का विरोध करे व किसान आन्दोलन में शामिल हों।
हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डाॅ. कुलदीप सिंह तंवर, राज्य महासचिव डाॅ. ओंकार शाद तथा जिलाध्यक्ष शिमला सत्यवान पुण्डीर ने रविवार को यहां संयुक्त बयान में सरकार की इस घेषणा को किसान-बागवानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि ये कोई पहली मर्तबा नहीं है, जब सरकार ने किसानों को इस तरह से भ्रमित करने का प्रयास किया है। इससे पहले भी दूध के दाम को लेकर भी पिछले तीन-चार वर्षों से दुग्धउत्पादकों को भ्रमित कर रही है तथा मात्र एक या दो रुपए की वृद्धि करके किसानों को गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि जिस समर्थन मल्य की बात मुख्यमंत्री जी कर रहे हैं वास्तव में यह मार्केट इंटरवेंशन (एमआईएस) स्कीम है, जो कल्ड फ्रूट के लिए मिलता है। क्योंकि कल्ड फ्रूट के बाजार में जाने से कीमतें गिर जाती है। इसलिए इस स्कीम का बागवानों को लाभ होता है। इस स्कीम के तहत पहले ही सरकार की लापरवाही के चलते सालभर से बागवानों को की जाने वाली 15 करोड़ की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डाॅ. कुलदीप तंवर कहा कि कहां तो सरकार से उम्मीद थी कि किसानों को ऐसे संकट के समय में कोई राहत पैकेज दिया जाएगा, लेकिन किसानों की अपने सालभर के खून-पसीने की कम के 2019-20 में कुल सेब उत्पादन 7.15 लाख मिट्रिक टन में से 61,117 हजार मिट्रिक टन सेब (33 हजार मिट्रिक टन जिसका मूल्य 26.5 करोड़ रुपए हिमफेड तथा 28 हजार मिट्रिक टन जिसका मूल्य 22.4 करोड़ है एचपीएमसी द्वारा) 8.5 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदा गया, जिसकी कुल राशि 48.9 करोड़ बैठती है। डाॅ. तंवर ने कहा कि इस कुल राषि में से 15 करोड़ रुपए की राशि जो एचपीएमसी के स्तर पर 10 करोड़ रुपए तथा हिमफेड के स्तर पर 5 करोड़ रुपए बकाया है, जिसे किसानों को दिया जाना बाकि है।
वहीं, राज्य महासचिव डाॅ. ओकार शाद ने कहा कि एक ओर तो धोखधड़ी के चलते आढ़तियों की मनमानी से करोड़ों रुपए का पिछले कई सालों का भुगतान कई बागवानों को अभी तक नहीं किया गया है, ऊपर से सेब पर एमआईएस के दाम को दुगना करने के बजाए केवल एक रुपये की वृद्धि को बागवानों के साथ भद्दा मजाक बताया है। किसान सभा लम्बे समय से इसे 8.5 रुपए से बढ़ाकर 16 रुपए करने की मांग कर रही थी। साथ ही सरकार द्वारा कार्टन तथा ट्रे के दामों में की गई भारी वृद्धि ने किसानों पर भयंकर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है, जिससे किसानों व बागवानों में जबरदस्त आक्रोष है।
जिलाध्यक्ष, शिमला सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि वर्तमान भाजपा की मोदी नेतृत्व वाली सरकार ने तो सारी हदें पार कर दी जब 2015 में पहली बार चुनकर आने पर सर्वोच्च न्यायालय में एफेडेविट देकर अपना पल्ला झाड़ दिया। दूसरी बार सत्ता में आने के लिए चुनावों के दौरान आनन-फानन में घोषणा तो कर दी लेकिन स्वामिनाथन आयोग के मुताबिक न्युनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया। और आज भी नहीं दिया जा रहा है, जिसके लिए देश का किसान पिछले सात महीनों से सड़क पर व्यापक आन्दोलन कर रहे हैं।
