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शिमला। माकपा ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सरकार द्वारा देश व प्रदेश में जल्दबाज़ी में लागू किये गए लॉकडाउन व कर्फ्यू के कारण गरीब, जरूरतमंद, मजदूर विशेष रूप से दिहाड़ीदार व अप्रवासी मजदूरों को बेहद परेशानी हो रही है। आज लॉकडाउन को लागू किए एक माह हो गया है और इससे इन मजदूरों को रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस विषम परिस्थिति में वह सामाजिक व आर्थिक रूप से असहज महसूस कर रहा है। क्योंकि आज इनके पास जो भी थोड़े बहुत साधन थे, वह समाप्त हो गए हैं। इस विषम परिस्थिति में आज यह मज़दूर जहां भी है वह असुरक्षित महसूस कर रहा है और अपने घर जाने के लिए बेहद आतुर है। माकपा सरकार से आग्रह करती है कि जो भी लोग, प्रवासी मजदूर या कोई अन्य जहां भी फंसा हुआ है और घर वापस आना या जाना चाहता है उसको घर तक छोड़ने का प्रबंध सरकार को करना चाहिए।

माकपा के राज्य सचिवमण्डल सदस्य संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में लॉकडाउन की जो घोषणा की गई, वह जल्दबाजी व बिना तैयारी के की गई है और इसके कारण करोड़ों मजदूर व अन्य लोग अपने घरों से दूर बिना किसी कार्य के फंस गए हैं। आज इनके पास जो भी साधन थे वह लगभग एक माह में समाप्त हो गए हैं। जिसके कारण इनको दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। सरकार द्वारा इनके लिये खाने व रहने के उचित व्यवस्था न होने से इनका संकट दिन प्रतिदिन गंभीर हो रहा है और यह लॉकडाउन व कर्फ्यू की स्थिति इनके लिये दिन प्रतिदिन भयावहः होती जा रही है और यदि सरकार द्वारा उचित कदम समय रहते नहीं उठाए गए तो यह एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।

चौहान ने कहा कि प्रदेश में भी लॉकडाउन व कर्फ्यू को लागू हुए एक माह बीत गया है। प्रदेश के भीतर व बाहर आज हजारो लोग जिन में अधिकतर दिहाड़ी, मेहनत मजदूरी करने वाले लोग है जो विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए हैं और अपने घर जाने की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जनता से अपील कर रहे हैं कि लॉकडाउन का पालन करें जो जहां पर है वहीं रहे, लेकिन प्रभावशाली व सरकार के करीबी लोगों को प्रदेश से बाहर से लाने के लिए सरकार लॉकडाउन व कर्फ्यू के सभी नियमों व कानूनों को ताक पर रख कर इनको लाया गया। वहीं, आम लोगों व मजदूरों को नहीं लाया जा रहा है। यह संविधान की मूल भावना जिसमे सभी को समान अधिकार दिए गए हैं उसका सरासर उलंघन है। 

कोटा से फ्री में लाए जा रहे विद्यार्थी और मजदूरों को निजी बसों में किराया देकर जाना पड़ रहा, माकपा का सवाल ऐसा क्यों
राज्य सरकार ने कोटा के लिए छात्रों को लेने के लिए जो अपने खर्च पर 9 बसे भेजी हैं उसमें प्रदेश के जो अन्य 10 लोग कोटा में फंसे हुए हैं उनको लाने की इजाजत सरकार ने नहीं दी है। इसके साथ ही लम्बी जद्दोजहद के बाद सरकार ने बड़ी संख्या में कश्मीर के मजदूर जो प्रदेश में इन विषम परिस्थितियों में फंसे हैं उनमें से भी कुछ लगभग 250 मजदूरों को अभी शिमला से अपने घर जाने की इजाजत दी है। परन्तु इनको जिस प्रकार से कोटा के लिये सरकार ने अपने खर्च पर बसे भेजी है, इन मजदूरों को बसें नही भेजी गई और इन्हें इस संकट की घड़ी में भी निजी बसों में अपनी जेब से 2000 हजार रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से खर्च करना पड़ा है। यह सरकार का मजदूर वर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण रवय्या दर्शाता है। सीपीएम मांग करती है कि सरकार प्रदेश के बाहर व भीतर जो भी फंसा हुआ है और अपने घर जाना चाहता है उसको घर भेजने के लिए सरकार तुरन्त कदम उठाए व जिस प्रकार से कोटा से छात्रों को लाने के लिए सरकार ने अपने खर्च पर बसे भेजी है वैसे ही प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों में फंसे लोगो व प्रदेश में फंसे मजदूरों व अन्य लोगो को घर भेजने का प्रबंध करें। 

By admin

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