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शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) प्रदेश सरकार व नगर निगम शिमला के द्वारा शिमला शहर में कई महीनों के भारी भरकम पानी व कूड़े के बिल देने की कड़ी निंदा की है। माकपा ने सरकार व नगर निगम शिमला से मांग की है कि इन अनुचित भारी भरकम बिलों को तुरंत वापिस ले तथा मीटर रीडिंग के आधार पर मासिक पानी व कूड़े के बिल जनता को दे। 

माकपा के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि शिमला शहर में जो पानी व कूड़े के बिल अभी कंपनी व नगर निगम ने हजारों व लाखों रुपए के बिल दिये हैं, उस पर नाजायज़ पेनेल्टी व सरचार्ज लगाए गये हैं, वह बिलकुल भी सही नहीं है और इसने सरकार व नगर निगम शिमला की लचर कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि आज शहर में कोई भी वर्ग ऐसे नहीं है जो सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों व लचर व्यवस्था से परेशान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंतनीय इसलिए भी है, जबकि शहर की जनता द्वारा चुने विधायक ही सरकार में शहरी विकास मंत्री हैं और उनके विभाग के तहत ही यह सब किया जा रहा है। 

चौहान ने कहा कि कोविड महामारी के चलते जहां सरकार को राहत प्रदान करनी चाहिए थी, वहां सरकार व नगर निगम राहत देने के बजाए जनता पर इस प्रकार के भारी भरकम अनुचित पानी व कूड़े के बिल जारी कर उन पर आर्थिक बोझ डालने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि  जबसे शिमला नगर निगम व प्रदेश में बीजेपी सत्तासीन हुई है, तबसे जनता पर पानी, बिजली, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा उठाने की फीस आदि की दरों में निरंतर बढ़ोतरी कर जनता पर आर्थिक बोझ डालने का कार्य किया जा रहा है। उनका कहना था कि वर्ष 2016 में पूर्व नगर निगम ने लम्बे संघर्ष के बाद शिमला की पेयजल व्यवस्था पूर्ण रूप से अपने अधीन ली थी तथा नगर निगम के प्रबंधन में ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सिवरेज सर्कल (GSWSSC) का गठन कर पेयजल सुधारने के लिए करीब 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था और जून, 2017 से मासिक पानी के बिल जारी करने की पूर्ण व्यवस्था कर दी थी। लेकिन जून, 2017 में नगर निगम शिमला में बीजेपी सत्तासीन होने के बाद सरकार व विश्व बैंक के दबाव में आकर नगर निगम की इस पूरी व्यवस्था को तहस नहस कर दिया और एक कंपनी शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) का गठन कर पेयजल व्यवस्था के निजीकरण का कार्य आरम्भ कर दिया। इसके परिणामस्वरूप न तो 3 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद जनता को मासिक पानी के बिल मिले और उसके बदले आज अनुचित भारी भरकम पानी के बिल दिये जा रहे हैं और अब लोकतांत्रिक रूप से जनता के द्वारा चुनी हुई नगर निगम का भी इस कंपनी के ऊपर कोई नियंत्रण नहीं है। 

संजय चौहान ने कहा कि सीपीएम सरकार से मांग करती है कि संविधान की मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए नगर निगम एक वैधानिक संस्था होने के कारण उसको अपने दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करने दिया जाए और इस कंपनी (SJPNL) को समाप्त कर पूर्व की भांति पूरी पेयजल की व्यवस्था नगर निगम के अधीन की जाए, ताकि शहर के द्वारा चुनी हुई सरकार अपने दायित्व का निर्वहन कर सके और जनता के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करे। उनका कहना था कि यदि सरकार इन अनुचित पानी व कूड़े के बिलों को वापिस नहीं लेती और इस कंपनी को समाप्त नहीं करती तो पार्टी सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों व लचर कार्यप्रणाली के विरुद्ध जनता को लामबंद कर आंदोलन तब तक चलाएगी, जब तक कि यह मांगें पूरी नहीं हो जाती और जनता को राहत नहीं मिल जाती। 

By admin

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