कहा – जहां प्राइवेट बसें मुनाफे में चल रही हैं, वहां एचआरटीसी को घाटे का सौदा बताकर रूट बंद करना जनता के साथ अन्याय
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की परिवहन सुविधा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : जम्वाल
मंडी। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के लगातार बढ़ते घाटे और बस रूट बंद किए जाने को लेकर सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद ही अपने आंकड़ों और दावों को लेकर भ्रमित है। एक तरफ सरकार दावा करती है कि प्रदेश को आर्थिक संकट से बाहर निकालकर लाभ की स्थिति में लाया गया है, वहीं दूसरी ओर लगातार कर्ज लिया जा रहा है। विधानसभा में दिए गए जवाब में एचआरटीसी का 2,272.24 करोड़ रुपये का संचित घाटा सामने आता है। ऐसे में सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर साफ दिखाई देता है।
जम्वाल ने कहा कि विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार 1 अगस्त 2026 तक पिछले तीन वर्षों में एचआरटीसी के कुल 282 बस रूट बंद किए गए हैं, जबकि 15 अन्य बस रूटों की सेवाओं में कटौती की गई है। सबसे चिंता की बात यह है कि बंद किए गए 282 रूटों में 196 रूट ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि एचआरटीसी केवल कमाई का माध्यम नहीं, बल्कि हिमाचल के आम आदमी की जीवनरेखा है। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा को केवल मुनाफे और घाटे के आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को घाटे की आड़ में जनता की जरूरतों को नजरअंदाज करने के बजाय यह देखना चाहिए कि आखिर एचआरटीसी की स्थिति यहां तक पहुंची कैसे। प्रदेश की सड़कें आज तक ठीक नहीं करवाई गई हैं। कई रूट खराब सड़कों के कारण प्रभावित हैं, तो कई जगह खराब बसों के कारण सेवाएं बाधित हैं। बसों की मरम्मत के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, स्पेयर पार्ट्स की कमी है और मैकेनिकों की कमी के कारण एचआरटीसी की बसें सड़कों पर खड़ी दिखाई देती हैं। जब सरकार परिवहन निगम को आवश्यक संसाधन और सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं करवाएगी, तो फिर रूट बंद होने और घाटा बढ़ने के लिए जनता को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है?
राकेश जम्वाल ने कहा कि सुक्खू सरकार ने एचआरटीसी को मजबूत करने के बजाय जनता को मिलने वाली सुविधाओं को ही लगातार कमजोर किया है। स्कूल के बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क यात्रा सुविधा, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को मिलने वाली 50 प्रतिशत किराये की सुविधा को बंद किया गया और इसके उलट किरायों में बढ़ोतरी की गई। यहां तक कि सामान का किराया भी किलो के हिसाब से वसूला जा रहा है। इसके बावजूद अगर निगम घाटे से नहीं उबर रहा है तो सरकार को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए, न कि बस रूट बंद कर ग्रामीण जनता की परेशानी बढ़ानी चाहिए।
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार की कार्यशैली ही ऐसी बन गई है कि पहले किसी अच्छी सरकारी व्यवस्था या इकाई को कमजोर किया जाता है, उसकी कमियां गिनाई जाती हैं और फिर उसे घाटे का सौदा बताकर बंद करने अथवा निजी हाथों में देने का रास्ता तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की संपदा और सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि उन्हें कमजोर करके निजी हितों के लिए अवसर पैदा करना। सरकार की नीतियों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश की सार्वजनिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर उन्हें अपने करीबी लोगों के लिए कमाई का जरिया बनाने की जमीन तैयार की जा रही है।
जमवाल ने कहा कि जिस रूट पर निजी बस संचालक अपनी बस चलाकर मुनाफे में सेवा दे रहे हैं, वहां एचआरटीसी का घाटा दिखाकर सरकारी बस बंद करना, सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को एचआरटीसी के घाटे पर केवल बयानबाजी करने के बजाय व्यवस्था सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए। बसों की समय पर मरम्मत, पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स और मैकेनिक उपलब्ध करवाने, खराब सड़कों को दुरुस्त करने तथा बंद किए गए ग्रामीण और दूरदराज रूटों को जनता की आवश्यकता के आधार पर पुनः बहाल करने की जरूरत है।
जम्वाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की कि एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर जनता की परिवहन सुविधा छीनने की नीति तत्काल बंद की जाए और निगम को मजबूत करने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना सामने लाई जाए। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी को बचाने का रास्ता रूट बंद करना नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधारना है। सरकार जनता की सुविधा को प्राथमिकता दे और घाटे का बहाना बनाकर हिमाचल की परिवहन व्यवस्था को कमजोर करना बंद करे।
मुनाफे में एचआरटीसी तो यात्रियों की सुविधाएं बंद क्यों? सरकार की कथनी-करनी में इतना फर्क क्यों?
राकेश जम्वाल ने सरकार द्वारा एचआरटीसी में सफर कर रहे यात्रियों को वर्षों से मिल रही ग्रीन, स्मार्ट और सम्मान कार्ड की सुविधाएं बंद करने पर भी घेरा। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार जनता को स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दे रही? उन्होंने कहा कि ग्रीन कार्ड पर मिलने वाली छूट, स्मार्ट कार्ड की सुविधा और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतें यात्रियों के लिए राहत का बड़ा माध्यम थीं। उन्होंने कहा कि अब इन सुविधाओं को समाप्त कर नए हिम बस प्लस कार्ड की व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसमें छूट भी सीमित कर दी गई है। साथ ही कार्ड की कीमत भी कई गुणा बढ़ा दी है। यानी एक तरफ रियायत कम की है, दूसरी तरफ कार्ड की अधिक कीमत अधिक की है। उन्होंने कहा कि अगर एचआरटीसी वास्तव में मुनाफे में है, तो फिर यात्रियों की जेब पर बोझ डालकर सुविधाएं कम करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ आर्थिक मजबूती के दावे करती है और दूसरी तरफ जनता को मिलने वाली रियायतें खत्म करती है। यह साफ तौर पर सरकार की कथनी और करनी में अंतर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीति और कागजी दावों से बाहर निकलकर जनता को बताए कि जब निगम मुनाफे में है तो यात्रियों की सुविधाओं में कटौती क्यों?
