नेगी ने राज्यपाल से इस मामले पर जल्द फैसला लेने की मांग की
शिमला। जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ जमीन का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। करीब साढ़े तीन साल से लंबित इस मामले को लेकर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से मुलाकात कर जल्द कार्रवाई की मांग की है। राजस्व मंत्री ने कहा कि हजारों पात्र लोग नौतोड़ जमीन मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर जनजातीय क्षेत्रों से लगातार पलायन हो रहा है और कई जमीनें खाली पड़ी हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के लिए नौतोड़ नियम अभी भी लागू हैं, लेकिन भूमि आवंटन में वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) 1980 की मंजूरी जरूरी है। केंद्र से मंजूरी के बिना नौतोड़ जमीन आवंटित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और वहां के लोगों के हितों को देखते हुए राज्यपाल के पास विशेष शक्तियां हैं। इसी आधार पर उनसे मामले को आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 2016 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार के समय इस कानून को सस्पेंड किया गया था और लोगों को इसका लाभ मिला था। इसके बाद 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद नौतोड़ का केवल एक मामला ही मंजूर हो पाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से इस मामले को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल से कई बार मुलाकात की गई है और इन बैठकों में भाजपा विधायक भी शामिल रहे हैं। हाल की मुलाकात में राज्यपाल ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
राजस्व मंत्री के अनुसार, प्रदेश में इस समय करीब 20 हजार नौतोड़ मामले लंबित हैं। नौतोड़ कानून के तहत जिन लोगों के पास 20 बीघा से कम जमीन हैं, वे इसके लिए पात्र हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल के व्यक्ति को लाभ देने का मामला नहीं है, बल्कि कानून में पात्रता तय है।
नेगी ने कहा कि नौतोड़ जमीन न मिलने से जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के सामने खेती और आजीविका का संकट बढ़ रहा है। यदि पात्र परिवारों को जमीन मिलती है तो वे खेती कर उत्पादन बढ़ा सकते हैं और अपने परिवार की आय का साधन मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक ओर जनजातीय क्षेत्रों से पलायन रोकने की बात करती है, वहीं नौतोड़ का मामला वर्षों से अटका हुआ है। अब साढ़े तीन साल बीत चुके हैं और लोगों में लगातार रोष बढ़ रहा है। सरकार ने राज्यपाल से लंबित मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर पात्र लोगों को नौतोड़ जमीन का लाभ दिलाने की मांग की है।
