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बोले – जरूरतमंदों के लिए बन सकती है जीवनरक्षक पहल 

दान किए गए पेसमेकर के सुरक्षित एवं नैतिक पुनः उपयोग के लिए बने राष्ट्रीय नीति और नियामक ढांचा, स्वास्थ्य मंत्रालय जारी करे स्पष्ट दिशा-निर्देश : खन्ना

शिमला। भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने मंगलवार को लोक भवन, शिमला में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से भेंट कर हार्ट वाल्व और पेसमेकर दान को देशव्यापी अभियान का स्वरूप देने तथा दान किए गए पेसमेकर के सुरक्षित, नैतिक और विनियमित पुनः उपयोग के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। 

अविनाश राय खन्ना ने कहा कि भारत में नेत्रदान तथा अंग एवं ऊतक दान को लेकर पिछले वर्षों में व्यापक जन-जागरूकता आई है, लेकिन हार्ट वाल्व डोनेशन और पेसमेकर डोनेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय अभी भी आम लोगों की जानकारी से काफी हद तक बाहर हैं। जबकि इनके माध्यम से हजारों जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने की क्षमता मौजूद है।‌ उन्होंने कहा कि दान किए गए मानव हृदय के वाल्व का उपयोग जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और जटिल वाल्व संबंधी बीमारियों से जूझ रहे वयस्क मरीजों के उपचार में किया जाता है। इसलिए नेत्रदान और अंगदान की तर्ज पर हार्ट वाल्व दान को लेकर भी व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। 

खन्ना ने ज्ञापन में पेसमेकर की ऊंची कीमत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि सिंगल-चैंबर पेसमेकर की अनुमानित कीमत 1.5 से 2.8 लाख रुपये, ड्यूल-चैंबर की 2.5 से 3.5 लाख रुपये, सीआरटी-पी की 3.8 से 5.5 लाख रुपये तथा लीडलेस पेसमेकर की कीमत 8 से 12 लाख रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च वहन करना अत्यंत कठिन होता है, जिससे कई मामलों में इलाज में देरी होती है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष ऐसे अनेक लोगों की मृत्यु होती है जिनके शरीर में लगे पेसमेकर में उपयोग योग्य बैटरी लाइफ शेष रहती है। उचित वैज्ञानिक परीक्षण, स्टरलाइजेशन और निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के बाद इनके पुनः उपयोग की संभावनाओं पर गंभीरता से राष्ट्रीय स्तर पर काम किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञापन में पूर्व भारतीय अध्ययनों तथा अस्पतालों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में वैज्ञानिक और चिकित्सकीय स्तर पर कार्य पहले भी हुआ है।

अविनाश राय खन्ना ने कहा कि वर्तमान में आवश्यकता एक मानकीकृत नियामक व्यवस्था, संस्थागत तंत्र और स्पष्ट राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों की है, जिससे पूरी प्रक्रिया में मरीज की सुरक्षा, सहमति, परीक्षण, स्टरलाइजेशन, ट्रेसबिलिटी और नैतिक मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि इस विषय को उचित स्तर पर उठाते हुए केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को राष्ट्रीय पहल के लिए अनुशंसा की जाए। ज्ञापन में प्रमुख रूप से तीन सुझाव दिए गए हैं। इनमें हार्ट वाल्व एवं पेसमेकर दान को मौजूदा नेत्रदान और अंगदान कार्यक्रमों से जोड़कर देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाना, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आईसीएमआर, सीडीएससीओ, नोटो तथा प्रमुख कार्डियक संस्थानों के परामर्श से दान किए गए पेसमेकर की प्राप्ति, परीक्षण, स्टरलाइजेशन, ट्रेसबिलिटी और विनियमित पुनः उपयोग के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार करना तथा हार्ट वाल्व दान एवं कार्डियोवैस्कुलर टिश्यू बैंकिंग की व्यवस्था को मजबूत और विस्तारित करना है। 

अविनाश राय खन्ना ने कहा कि नेत्रदान और अंगदान की तरह हार्ट वाल्व और उपयोग योग्य पेसमेकर दान को भी सेवा और जीवनदान के राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को जीवनरक्षक उपचार सुलभ कराने में सहायता मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर उपयोगी चिकित्सा संसाधनों को व्यर्थ होने से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति के अंग, हार्ट वाल्व अथवा उपयोग योग्य चिकित्सा उपकरण किसी जरूरतमंद के जीवन की आशा बन सकते हैं। इस मानवीय पहल को सुव्यवस्थित राष्ट्रीय नीति का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। 

By admin

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