कहा – आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर पर भी सरकार का फोकस
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रदेश के लगभग 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही बड़े स्तर पर स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना को मंजूरी मिलने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें देश और विदेश में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। वहीं, राज्य सरकार सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर इकोसिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है।
राजेश धर्माणी ने यहां मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जापान, जर्मनी, इजरायल, ब्रिटेन सहित कई विकसित देशों में कुशल मानव संसाधन की मांग लगातार बढ़ रही है। इन देशों में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, निर्माण, उद्योग और तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवाओं में क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रोजगार के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं होती। वहां श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाता है और प्रत्येक कार्य के लिए तय मानकों एवं सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य होता है। इसके अलावा स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान भी कई देशों में जरूरी होता है। इसलिए सरकार कौशल विकास के साथ-साथ भाषा प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दे रही है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा ही प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि युवाओं के पास आधुनिक तकनीकी ज्ञान और आवश्यक कौशल होगा तो उनके लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और वे देश की अर्थव्यवस्था में बेहतर योगदान दे सकेंगे। उन्होंने प्रदेश में टेक्सटाइल पार्क, स्पाइस पार्क और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क की योजनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पहले भी इन परियोजनाओं की अधिसूचना जारी हुई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। केवल किसी क्षेत्र को अधिसूचित कर देने से उद्योग स्थापित नहीं होते, बल्कि उसके लिए पूरा इकोसिस्टम तैयार करना पड़ता है।
राजेश धर्माणी ने कहा कि यदि किसी इंजीनियर, वैज्ञानिक या आईटी प्रोफेशनल को हिमाचल में काम करना है तो वह केवल नौकरी नहीं देखेगा, बल्कि अच्छी आवास व्यवस्था, बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी देखेगा। यदि ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो उद्योगों को भी अपेक्षित सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में सरकार औद्योगिक परियोजनाओं के साथ-साथ पूरा इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर देगी, ताकि निवेशकों के साथ-साथ कुशल मानव संसाधन भी हिमाचल में लंबे समय तक कार्य कर सकें।
राजेश धर्माणी ने कहा कि भारत का सॉफ्टवेयर निर्यात वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन हिमाचल अभी अपनी क्षमता के अनुरूप इस क्षेत्र में योगदान नहीं दे पाया है। ऐसे में सरकार सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे प्रदेश में निवेश बढ़े और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
सुधीर शर्मा को अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए, कांग्रेस की नहीं : राजेश धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के कांग्रेस संगठन और सरकार पर दिए जा रहे बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि अब उन्हें कांग्रेस नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक संगठित राजनीतिक दल है और संगठन से जुड़े फैसले पार्टी नेतृत्व समय-समय पर लेता है। धर्माणी ने कहा कि जब सुधीर शर्मा कांग्रेस में थे, तब यदि उन्हें संगठन की चिंता होती तो बेहतर होता। अब वह भारतीय जनता पार्टी में हैं, इसलिए उन्हें भाजपा के संगठन और उसके आंतरिक मामलों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास सक्षम नेतृत्व है और पार्टी अपने संगठनात्मक फैसले स्वयं लेने में सक्षम है। भाजपा में आंतरिक मतभेदों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि समय-समय पर मीडिया में भाजपा के भीतर गुटबाजी और खींचतान की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं को पहले अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। भाजपा नेताओं पर राजनीतिक द्वेष के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने के आरोपों पर धर्माणी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई प्रत्येक कथित अनियमितता की पूरी गंभीरता से जांच होती, तो कई नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो सकते थे।
धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार किसी के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम नहीं कर रही है। जहां गंभीर अनियमितता, भ्रष्टाचार या कानून के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, वहां कानून अपना काम करता है। सरकार का उद्देश्य हर छोटी बात पर एफआईआर दर्ज करना नहीं है, लेकिन जहां सार्वजनिक हित प्रभावित होता है या गंभीर गड़बड़ी सामने आती है, वहां निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी है।
