शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रदेश सरकार की भर्ती नीतियों और सरकारी सेवाओं के निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए सभी विभागों में नियमित भर्ती करने की मांग उठाई है। पार्टी ने कहा है कि पार्ट टाइम, अंशकालिक, कैजुअल, आउटसोर्स, ठेका और जॉब ट्रेनी जैसी अस्थायी नियुक्तियों से युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो रहा है और प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या और गंभीर बनेगी।
माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने रविवार को यहां कहा कि सरकार लगातार भर्ती नियमों में बदलाव कर स्थायी रोजगार की जगह कम वेतन और बिना रोजगार सुरक्षा वाली अस्थायी नियुक्तियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से विशेष रूप से शिक्षित युवाओं में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के पदों पर ही अस्थायी भर्ती की जा रही थी, लेकिन अब ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के पदों पर भी यही व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके उदाहरण के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में 162 डॉक्टरों तथा कॉलेजों में 335 सहायक प्रोफेसरों की जॉब ट्रेनी नीति के तहत की जा रही भर्ती का उल्लेख किया।
चौहान ने कहा कि डॉक्टरों को 34 हजार रुपये और सहायक प्रोफेसरों को 35 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित वेतन दिया जाएगा तथा यह नियुक्ति केवल दो वर्ष के लिए होगी। इसके बाद पद सृजित होने पर उन्हें दोबारा परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे नियमित रोजगार की कोई गारंटी नहीं रहती।
संजय चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें नवउदारवादी नीतियों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सेवाओं का धीरे-धीरे निजीकरण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे एक ओर आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि दूसरी ओर रोजगार के अवसर कम होंगे। निजीकरण के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं महंगी हो जाएंगी और आम लोगों की पहुंच से दूर होती चली जाएंगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट को बढ़ाने वाली नीतियों को तत्काल वापस लिया जाए, निजीकरण पर रोक लगाई जाए तथा सभी विभागों में स्थायी रोजगार की नीति लागू कर नियमित भर्तियां की जाएं।
चौहान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो माकपा आम जनता को संगठित कर इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से केंद्र और राज्य सरकार की नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील भी की।
