पश्चिम बंगाल विधानसभा के नव निर्वाचित सदस्यों के प्रबोधन कार्यक्रम में बोले हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष, आजादी के बाद केवल 14 प्राइवेट मेंबर बिलों को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि प्राइवेट मेंबर बिल भले ही कम संख्या में कानून बन पाते हों, लेकिन लोकतंत्र में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे विधेयक नए विचारों को सामने लाने, जनहित के मुद्दों पर बहस शुरू करने, जनमत तैयार करने और सरकार को नीति एवं कानूनों पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम हैं।
पठानिया कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर एवं विधानसभा भवन में पश्चिम बंगाल विधानसभा तथा लोकसभा सचिवालय की संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) द्वारा नव निर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के तीसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे। उनका विषय “विधायी कार्यों के साथ गैर-सरकारी सदस्य (प्राइवेट मेंबर) विधेयक” था।
अपने संबोधन में कुलदीप पठानिया ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक संसद में केवल 14 प्राइवेट मेंबर बिलों को ही राष्ट्रपति की मंजूरी मिल सकी है, जबकि वर्ष 1970 के बाद कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के दोनों सदनों से पारित नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि केवल 17वीं लोकसभा में ऐसे 729 प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किए गए, जिनमें से मात्र दो विधेयकों पर चर्चा हो सकी। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्वयं इस व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं।

पठानिया ने स्पष्ट किया कि जो सांसद या विधायक मंत्री नहीं होता, उसे प्राइवेट मेंबर (निजी सदस्य) कहा जाता है और उसके द्वारा प्रस्तुत विधेयक को प्राइवेट मेंबर बिल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत पहले प्राइवेट मेंबर बिलों के रूप में हुई और बाद में सरकार ने उन्हें अपने विधेयकों में शामिल कर कानून का रूप दिया। इसलिए ऐसे विधेयकों की सफलता केवल कानून बनने से नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति को प्रभावित करने की क्षमता से भी आंकी जानी चाहिए।
पठानिया ने कहा कि विधायी प्रक्रिया केवल औपचारिक नियमों का पालन भर नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को लागू करने योग्य अधिकारों और दायित्वों में बदलने की संवैधानिक व्यवस्था है। नीति निर्माण, विधेयक का प्रारूप तैयार करना, सदन में चर्चा, समिति द्वारा परीक्षण, संशोधन और अंतिम मंजूरी जैसी प्रत्येक प्रक्रिया कानून की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वर्षों के संसदीय अनुभव से विकसित हुई है।
नव निर्वाचित विधायकों को संबोधित करते हुए पठानिया ने कहा कि उन्हें लोकतंत्र की इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला है। सदन में आने वाला प्रत्येक विधेयक शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है, वहीं प्रत्येक प्राइवेट मेंबर बिल सार्वजनिक नीति में नए विचार प्रस्तुत करने का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे जिज्ञासा, संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा तथा जनहित के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के साथ अपने विधायी दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि किसी विधायक की वास्तविक विरासत उसके कार्यकाल की अवधि या दिए गए भाषणों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके योगदान से बने प्रभावी कानूनों, सार्थक बहसों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में निभाई गई भूमिका से तय होती है।
कार्यक्रम के दौरान सत्र को एन. के. प्रेमचन्द्रन तथा प्रदीप चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया।
समिति ने प्रारूप प्रतिवेदन को दी अंतिम मंजूरी
प्रबोधन कार्यक्रम के उपरांत समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की महत्वपूर्ण बैठक समिति कक्ष में आयोजित हुई। बैठक में समिति के प्रारूप प्रतिवेदन को अंतिम रूप देकर सभी सदस्यों ने उस पर हस्ताक्षर करते हुए अनुमोदित एवं पारित किया।
सायंकाल आयोजित सांस्कृतिक संध्या के दौरान समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से ओम बिरला को प्रारूप प्रतिवेदन की हस्ताक्षरित प्रति सौंपते हुए समिति को सौंपी गई जिम्मेदारी से अवगत कराया। लोकसभा अध्यक्ष ने समयबद्ध और सफलतापूर्वक कार्य पूर्ण करने पर समिति के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
