शिमला। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने प्रदेश सरकार द्वारा संजय गुप्ता को नियमित मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे प्रशासनिक नैतिकता, संस्थागत शुचिता और जनविश्वास पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार के “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” के दावों की वास्तविकता को उजागर करता है।
सीपीआई (एम) के राज्य सचिव संजय चौहान ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, लंबित एफआईआर, आपराधिक संदर्भ और सतर्कता संबंधी शिकायतें लंबित हों, उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर नियुक्त करना लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्वयं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भी “इंस्टीट्यूशनल इंटेग्रिटी” जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर सवाल उठाते हुए नोटिस जारी कर चुका है।
चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह नियुक्ति केवल इसलिए की है ताकि संबंधित अधिकारी को सेवा विस्तार देने का मार्ग प्रशस्त किया जा सके, क्योंकि सेवा विस्तार नियमित पद पर ही संभव होता है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार हर हाल में उक्त अधिकारी को संरक्षण देने की कोशिश कर रही है।
संजय चौहान ने कहा कि पार्टी लंबे समय से संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को जनता के बीच उठाती रही है। उन्होंने चेस्टर हिल भूमि प्रकरण तथा हिमाचल प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन लिमिटेड में करोड़ों रुपये की खरीद और ट्रांसमिशन लाइन आवंटन से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन प्रकरणों से संबंधित विस्तृत शिकायतें विभिन्न जांच एजेंसियों को भेजी जा चुकी हैं।
संजय चौहान ने कहा कि वर्ष 2009 में जांच एजेंसी द्वारा अधिकारी की गाड़ी से नकदी बरामद होने के बाद गिरफ्तारी और निलंबन जैसी घटनाओं का संज्ञान अब उच्च न्यायालय द्वारा भी लिया जा चुका है। इसके बावजूद सरकार द्वारा उन्हें नियमित मुख्य सचिव बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी निर्णय है। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं जैसे गंभीर मामलों पर विपक्ष का मौन रहना जनता के बीच गलत संदेश दे रहा है और इससे सत्ता तथा विपक्ष के बीच अंदरूनी सहमति की आशंका पैदा होती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि वह इस निर्णय के खिलाफ कानूनी, राजनीतिक और जनआंदोलन के स्तर पर संघर्ष को तेज करेगी। संजय चौहान ने कहा कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ विस्तृत भ्रष्टाचार शिकायत तैयार की गई है और आने वाले समय में इस मुद्दे को व्यापक रूप से जनता के बीच उठाया जाएगा।
चौहान ने मांग की कि 26 मई 2026 को जारी नियमित मुख्य सचिव नियुक्ति संबंधी कार्यालय आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए, सेवा विस्तार की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए तथा लंबित मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।
