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सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष का तीखा प्रहार, कहा, वर्तमान प्रदेश सरकार केवल मंचों से भाषणबाजी और बड़ी-बड़ी बातें करने तक सीमित‌ 

कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन 225 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के निरीक्षण में खामियों को बताया प्रशासनिक विफलता और सरकार के भीतर समन्वय की कमी का जीता-जागता प्रमाण 

मंडी। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि वर्तमान प्रदेश सरकार केवल मंचों से भाषणबाजी और बड़ी-बड़ी बातें करने तक सीमित रह गई है, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत और निराशाजनक है। कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन 225 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों पर बरसने और काम रुकवाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम बठाकुर ने कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता और सरकार के भीतर समन्वय की कमी का जीता-जागता प्रमाण है।

जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए पूछा कि जिस प्रोजेक्ट को फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, उसके बारे में मुख्यमंत्री को अप्रैल में आकर यह याद क्यों आ रहा है कि वहां मशीनें नहीं लगी हैं या तकनीक में बदलाव कर दिया गया है। उन्होंने पूछा कि क्या पिछले कई महीनों से इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का कोई सुपरविजन नहीं किया जा रहा था या फिर पूरी सरकार ही नींद में है?

 जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह दावा कि उन्होंने “ऑटोमैटिक” प्लांट बनाने को कहा था और अधिकारियों ने “मैनुअल” तकनीक लगा दी, यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की उनके ही विभाग में कोई अहमियत नहीं है और फाइलों पर वह सब कुछ हो रहा है जिसकी जानकारी मुखिया को महीनों बाद लग रही है। अधिकारियों मुख्यमंत्री की कमजोर नस पकड़ ली है और अब वह पूरी मनमानी कर रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री के निर्देश की अनुपालना नहीं हुई थी तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की? 

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर रौद्र रूप दिखाकर अधिकारियों की क्लास लगाना केवल एक राजनीतिक स्टंट और फोटो-ऑप है ताकि अपनी विफलताओं को छिपाया जा सके, क्योंकि यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती तो समय रहते तकनीकी खामियों और निर्माण की धीमी रफ्तार को दुरुस्त किया जाता, न कि प्रोजेक्ट की डेडलाइन के इतने करीब आकर काम रुकवाया जाता। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 225 करोड़ रुपये की जनता की गाढ़ी कमाई से बन रहे इस प्लांट के डिजाइन में बदलाव और गुणवत्ता से समझौता होना प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ है और यह सिद्ध करता है कि सुक्खू सरकार में निर्णय कहीं और लिए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री केवल मंचों पर घोषणावीर बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने दिनों तक यह काम किसके भरोसे चल रहा था और क्या मुख्यमंत्री को इस बात का अहसास नहीं है कि उनकी इस “हवा-हवाई” कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश के विकास कार्य बुरी तरह ठप पड़ चुके हैं। 

जयराम ठाकुर ने मांग की कि केवल अधिकारियों को फटकारने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे तो तकनीक बदलने का दुस्साहस किसने किया और इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन जवाबदेह है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस सरकार के इन विरोधाभासी बयानों और दिखावे की राजनीति को समझ चुकी है, जहां मुख्यमंत्री कहते कुछ और हैं, फाइलों पर कुछ और होता है और धरातल पर काम की रफ्तार शून्य रहती है, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने से राजकोष पर भी अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।

कृषि विश्वविद्यालय की जमीन मामले में सरकार को झटका 

पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की जमीन को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार करने पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन मुख्यमंत्री को आगाह किया था कि विश्वविद्यालय की बेशकीमती जमीन बेचने या उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए डायवर्ट करने का फैसला कानून की कसौटी पर एक दिन भी नहीं टिकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के संसाधनों को अपने ‘मित्रों’ पर लुटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें कोई भी उनका साथ नहीं देगा। ​नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनभावना और नियमों के विरुद्ध फैसले लेकर सरकार न केवल प्रदेश के विकास की संभावनाओं पर विराम लगा रही है, बल्कि फिजूल की कानूनी लड़ाइयों में प्रदेश की ऊर्जा और संसाधन भी बर्बाद कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि वे अपनी नीतियों और निर्णयों में ‘हिमाचल हित’, जनभावना और स्थापित नियमों का सम्मान करें। 

By admin

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