सोलन। शूलिनी विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीतिका किमटा को सेब के सतत संरक्षण पर शोध के लिए 17.35 लाख रुपये का प्रतिष्ठित अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की प्रधानमंत्री प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान अनुदान योजना के तहत प्रदान किया गया है। परियोजना की अवधि 36 महीने निर्धारित की गई है।
‘फाइलेन्थस एम्ब्लिका एल. फल के छिलके का उपयोग पेक्टिन-व्युत्पन्न खाद्य कोटिंग संश्लेषण के लिए और मालुस डोमेस्टिका किस्मों के शेल्फ लाइफ और कटाई के बाद संरक्षण को बढ़ाने में इसकी कार्यात्मक प्रभावकारिता’ विषय पर आधारित यह शोध खाद्य संरक्षण के क्षेत्र में एक अभिनव और पर्यावरण-अनुकूल समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।
अध्ययन के तहत आंवला (फाइलेन्थस एम्ब्लिका) के छिलके से पेक्टिन निकालकर जैव-अपघटनीय खाद्य कोटिंग तैयार की जाएगी। इस कोटिंग का उपयोग सेब की विभिन्न किस्मों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और कटाई के बाद उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाएगा।
यह परियोजना कृषि अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग के माध्यम से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप पर्यावरण हितैषी तकनीकों को बढ़ावा देने का भी प्रयास करती है।
डॉ. नीतिका किमटा हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू उपमंडल के थाना (टिक्कर) गांव की निवासी हैं। उनका यह शोध क्षेत्र की बागवानी फसलों, विशेषकर सेब, से उनके गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है।
वनस्पति विज्ञान, पादप शरीर क्रिया विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. किमटा अब तक 35 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुकी हैं। वह औषधीय पौधे और उनके नैनोकण: मानव रोगों के विरुद्ध दोधारी तलवार पुस्तक की लेखिका भी हैं।
