शिमला। पंजाब विधान सभा की आश्वासन समिति मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंची, जहां समिति ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से शिष्टाचार भेंट की। समिति दो दिवसीय अध्ययन प्रवास पर हिमाचल प्रदेश आई हुई है।
समिति के सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में डॉ. जसबीर सिंह संधू, नरेश कटारिया तथा सरदार रनबीर सिंह शामिल रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी अतिथियों को पारंपरिक हिमाचली टोपी एवं शॉल पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा भी उपस्थित थे।
ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा
भेंट के दौरान अध्यक्ष पठानिया ने हिमाचल और पंजाब के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों का रिश्ता अत्यंत पुराना और मजबूत रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब पंजाब विधानसभा के सत्र इसी ऐतिहासिक सदन में आयोजित किए जाते थे, जिसकी अपनी विशेष पृष्ठभूमि रही है।

कौंसिल चैम्बर की विरासत पर प्रकाश
बैठक उपरांत अध्यक्ष पठानिया स्वयं समिति सदस्यों को सदन और कौंसिल चैम्बर लेकर गए। उन्होंने बताया कि यह भवन न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय धरोहर के रूप में भी महत्वपूर्ण है। कौंसिल चैम्बर भवन का निर्माण वर्ष 1920 में आरंभ हुआ और 1925 में पूर्ण हुआ, जिसकी लागत उस समय लगभग 10 लाख रुपये थी।
पठानिया ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि वर्ष 1925 में विट्ठल भाई पटेल प्रथम राष्ट्रीय असेम्बली के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उन्होंने अपने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को दो मतों से पराजित किया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विट्ठल भाई पटेल, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अग्रज एवं पेशे से बैरिस्टर थे। उस समय राष्ट्रीय असेंबली में 145 सदस्य थे, जबकि वर्ष 1919 में फ्रेडरिक व्हाईट को राष्ट्रीय असेंबली का प्रथम मनोनीत अध्यक्ष बनाया गया था।
अध्यक्ष ने कहा कि ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों तथा महिलाओं को मताधिकार देने से संबंधित ऐतिहासिक निर्णय भी इसी सदन में पारित किए गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1925 में टीक लकड़ी से निर्मित एक विशेष कुर्सी बर्मा (वर्तमान म्यांमार) सरकार द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को उपहार स्वरूप भेंट की गई थी, जिसे आज भी अध्यक्ष द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है।
ई-विधान प्रणाली पर विचार-विमर्श
इस दौरान समिति के सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी ने पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति की कार्यप्रणाली और गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पंजाब विधानसभा वर्तमान में राष्ट्रीय ई-विधान प्रणाली को अपनाए हुए है।
अध्यक्ष पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य रहा है जिसने ई-विधान प्रणाली को अपनाया और वर्तमान में लगभग 22 राज्य इसका अनुसरण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रणाली को सराहना मिली है तथा मलेशिया संसद के अध्यक्ष भी हिमाचल की ई-विधान प्रणाली का अध्ययन करने यहां पहुंच चुके हैं।
इस अवसर पर दोनों राज्यों के बीच संसदीय कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और तकनीकी आधुनिकीकरण को लेकर सकारात्मक संवाद हुआ तथा भविष्य में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।
