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शिमला। छात्र-अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों में पूरी फीस लागू करने के निर्णय पर राज्य सरकार को चेताया है। मंच ने कहा है कि अगर अभिभावकों से वर्ष 2019 की तर्ज़ पर ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस व चार्जेज़ वसूलने की कोशिश की गई तो मंच सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेगा।
मंच के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, सह संयोजक बिंदु जोशी, सदस्य फालमा चौहान, विवेक कश्यप, शैलेन्द्र मेहता, राजेन्द्र शर्मा, जय सिंह व राकेश रॉकी ने कहा है कि प्रदेश सरकार का निजी स्कूलों के साथ प्रेम समझ से परे है। मार्च से लेकर अब तक पिछले आठ महीनों में बच्चों की एक भी फिज़िकल क्लास नहीं लगी है। निजी स्कूलों में बिजली, पानी से लेकर अन्य किसी भी चीज की ज़रा भी खपत नहीं हुई है। ज़्यादातर स्कूलों ने आधे अध्यापकों व कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। स्कूल की कोई भी वस्तु छात्रों ने इस्तेमाल नहीं की है। फिर निजी स्कूल किस बात के पूरे पैसे वसूलना चाहते हैं। उन्होंने निजी स्कूलों के इस तर्क को पूरी तरह नकार दिया है कि निजी स्कूलों को अपना खर्चा चलाने में दिक्कत आ रही है। स्कूल न लगने के कारण उनके बिजली, पानी व कूड़े के कोई बिल नहीं आ रहे हैं। उनका अध्यापकों व कर्मचारियों के वेतन के अलावा कोई खर्च नहीं हो रहा है। ज़्यादातर स्कूलों ने जो ट्यूशन फीस भी वसूली है, वह कुल फीस का लगभग 80 प्रतिशत से ज़्यादा है। इन स्कूलों का खर्चा कोरोना में स्कूल न लगने के कारण आधे से भी कम हो गया है, जबकि इन्होंने लगभग 80 फीसदी से ज़्यादा फीस वसूल ली है। इस तरह इन्होंने कोरोना काल में भी चांदी कूटी है।
विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों से मिलभगत कर रही है क्योंकि ज़्यादातर स्कूल इसके चहेतों व राजनीतिक रसूख रखने वालों के हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि कोरोना काल में अभिभावकों को अपने दो बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं सुनिश्चित करने के लिए दो-दो नए मोबाइल खरीदने पड़े, जिससे उन पर लगभग 15  से 20 हज़ार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। इसके अलावा इन दो मोबाइलों के नेट इस्तेमाल करने से अभिभावकों को हर महीने लगभग पांच सौ रुपये का अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इस तरह पूरे वर्षभर में अभिभावकों पर जहां लगभग 25 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, वहीं स्कूल में कक्षाएं न लगने से अध्यापकों व कर्मचारियों के वेतन के अलावा उनके सभी तरह के खर्चे लगभग शून्य हो गए हैं। ऐसे में टयूशन फीस के अलावा अन्य फीसें व चार्जेज़ वसूलने की निजी स्कूलों को कतई भी इज़ाज़त नहीं दी जानी चाहिए। मेहरा ने कहा कि निजी स्कूलों को पूरी फीस वसूलने की इज़ाज़त देने के बजाए, सरकार को मोबाइल व नेट पर अतिरिक्त खर्चे के लिए अभिभावकों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि यह बेहद हास्यास्पद है कि विंटर स्कूलों में वर्षभर में बिना किसी फिज़िकल क्लास के शून्य सत्र में दो सप्ताह बाद फाइनल एग्जाम शुरू हो रहे हैं व नवम्बर अंत तक स्कूलों का सैशन क्लोज़ हो जाएगा तथा सरकार व निजी स्कूल अभिभावकों को पूरी फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। इसी से स्पष्ट है कि सरकार व निजी स्कूलों की मिलीभगत है।

By admin

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