शिमला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्रीय बजट पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इस बार केंद्र सरकार ने बजट के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में किसी भी वर्ग के लिए न तो कोई ठोस राहत है और न ही विकास की कोई स्पष्ट दिशा। बजट को दिशाहीन करार देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य की जरूरतों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए विनय कुमार ने कहा कि हिमाचल आपदा से जूझ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने आपदा राहत के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की राशि आज दिन तक प्रदेश को नहीं मिली है, जो केंद्र की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल केंद्र से कोई खैरात नहीं मांग रहा, बल्कि अपने संवैधानिक हक की मांग कर रहा है।
विनय कुमार ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इससे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस बजट में न तो पर्यटन विकास के लिए कोई नई योजना दी गई है और न ही बागवानी व कृषि क्षेत्र के लिए कोई विशेष प्रावधान किया गया है। जलविद्युत परियोजनाओं के विकास को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है, जबकि यह क्षेत्र प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था पहले ही केंद्र की नीतियों के कारण संकट में है।
रेल विस्तार को लेकर विनय कुमार ने कहा कि हर साल बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा। बिलासपुर-भानुपल्ली रेल लाइन पिछले कई वर्षों से अधर में लटकी हुई है और इस बजट में भी इस परियोजना के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के साथ लगातार हो रहे अन्याय का उदाहरण है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार जितने भी रोड़े अटकाए, प्रदेश सरकार अपने विकास पथ से डगमगाने वाली नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को जारी रखेगी।
विनय कुमार ने प्रदेश से चुने गए सभी भाजपा सांसदों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें हिमाचल के हितों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों ने बजट के दौरान प्रदेश की आवाज संसद में मजबूती से नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग इस उपेक्षा को याद रखेंगे और समय आने पर इन नेताओं को जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल के साथ किए गए इस “कुठाराघात” के खिलाफ कांग्रेस पार्टी हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी और प्रदेश के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
