शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर कुलपति कार्यालय के बाहर एक प्रभावशाली मूक प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों, शोधार्थियों, विभिन्न संकायों के प्रतिनिधियों तथा परिषद पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रदेश सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान उन गंभीर चुनौतियों की ओर आकर्षित करना था जिनका सीधा प्रभाव प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पिछले कई वर्षों से लगातार अव्यवस्था, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होती रही है। न केवल विश्वविद्यालयों में, बल्कि प्रदेश के अधिकांश महाविद्यालयों में भी शैक्षणिक माहौल बद से बदतर होता जा रहा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समय पर परिणाम, सुरक्षित परिसर और उचित सुविधाएँ उपलब्ध करवाना सरकार एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है, परंतु इन मोर्चों पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। परिषद ने कहा कि इन्हीं समस्याओं को लेकर आज यह मूक प्रदर्शन आयोजित किया गया, जो छात्रों की बढ़ती व्यथा और आक्रोश का संकेत है।
एबीवीपी की विवि इकाई मीडिया सह संयोजक शिवांगी शर्मा ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े इन गंभीर प्रश्नों का असर केवल विश्वविद्यालय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसी संदर्भ में परिषद ने प्रदेश सरकार से यह मांग की कि छात्र नेतृत्व को पुनर्जीवित करने और छात्र समस्याओं को लोकतांत्रिक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रदेश में छात्र संघ चुनावों को तत्काल बहाल किया जाए। लंबे समय से चुनाव न होने के कारण छात्रों की आवाज़ दब गई है और उनके मुद्दों के समाधान के लिए कोई संस्थागत तंत्र शेष नहीं रहा है। परिषद ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को प्रदेश में संपूर्ण रूप से लागू करना समय की अत्यंत आवश्यकता है। कई राज्यों में यह नीति पूरी तरह लागू कर दी गई है, जबकि हिमाचल प्रदेश अभी भी अधूरी प्रगति की स्थिति में है, जिससे छात्र राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं। एबीवीपी ने यह भी कहा कि प्रदेश के महाविद्यालयों और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्रों की आधारभूत संरचना अत्यंत दयनीय स्थिति में है। कई जगह पर कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और स्वच्छ पेयजल, इंटरनेट जैसी मूल सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। परिषद ने मांग की कि सरकार इन संस्थानों में मजबूत अधोसंरचना विकसित करने के लिए विशेष बजट और प्राथमिकता सुनिश्चित करे।
मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर भी परिषद ने गंभीर चिंता जताई। एबीवीपी ने कहा कि विश्वविद्यालयों HPU और SPU में परिणामों में देरी, गलत मूल्यांकन, उत्तर-पुस्तिकाओं में गड़बड़ियाँ और पारदर्शिता का अभाव छात्रों के रिकॉर्ड, कैरियर और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के अवसरों को प्रभावित कर रहा है। मूल्यांकन को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिस पर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, परिषद ने प्रदेश में बढ़ती नशा खोरी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। एबीवीपी ने कहा कि युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाले संगठनों पर कड़ी कार्रवाई करना आवश्यक है और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए, क्योंकि असुरक्षित वातावरण शिक्षा पर सीधा असर डालता है।
परिषद पदाधिकारियों ने सरकार और प्रशासन को यह स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो एबीवीपी आने वाले दिनों में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा करेगी। परिषद ने कहा कि वह वर्षों से छात्रों की आवाज़ बनकर खड़ी रही है और भविष्य में भी छात्र हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने में पीछे नहीं हटेगी। परिषद का यह मूक प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत भी रहा कि अब समस्याओं को अनदेखा करना संभव नहीं है।
