बोले – 1996 में हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक, 1999 में भाजपा सरकार ने पूरी तरह किया था इसे बंद
शिमला। भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रेम कुमार धूमल ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सरकार की चार दिवसीय महामंथन मंत्रिमंडल बैठक के बाद लिए गए लॉटरी को पुनः आरंभ करने के निर्णय की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी बताते हुए कहा कि यह फैसला हिमाचल को बर्बादी की ओर धकेल देगा।
धूमल ने कहा कि 17 अप्रैल 1996 को उच्च न्यायालय ने सिंगल डिजिट लॉटरी पर रोक लगाई थी। इसके बाद जब 1998 में वे पहली बार मुख्यमंत्री बने तो 1999 में उनकी सरकार ने सर्वसम्मति से पूरे प्रदेश में लॉटरी सिस्टम को ही पूरी तरह बंद कर दिया।
धूमल ने कहा, “यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि हिमाचल के लोगों को बर्बादी से बचाने की दूरदर्शी सोच थी। उस दौर में कर्मचारी, सेवानिवृत, मजदूर और युवा बड़ी संख्या में लॉटरी में पैसा लगाने लगे थे। वेतन, पेंशन और बचत दांव पर लगने लगी थी, कई परिवार तबाह हो गए थे। इसी कारण हमने लॉटरी को पूर्ण रूप से बंद कर दिया।”
कांग्रेस ने 2004 में फिर शुरू की, बाद में वीरभद्र ने भी लगाया था प्रतिबंध
पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने कहा कि 2004 में कांग्रेस सरकार ने लॉटरी को फिर शुरू किया, लेकिन कुछ ही समय बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी इस प्रणाली को अभिशाप मानते हुए बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार को लॉटरी से केवल 4-5 करोड़ रुपये की आय होती थी, लेकिन इसके नुकसान कहीं ज्यादा थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में लगभग 2,31,180 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें से 1,60,000 पक्के कर्मचारी हैं। इसके अलावा प्रदेश में 9 से 10 लाख बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि लॉटरी जैसे निर्णय से इन सभी वर्गों का जीवन प्रभावित होगा। यह प्रथा उनकी मेहनत की कमाई को दांव पर लगा देगी।
कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों पर सवाल
धूमल ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने पहले कैबिनेट में 1 लाख युवाओं को और पांच साल में 5 लाख युवाओं को पक्की नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन अब जो तस्वीर सामने आ रही है, वह यह है कि हिमाचल शराब, चिट्टा, भांग, नशा और लॉटरी का गढ़ बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगारी दूर करने के बजाय युवाओं को जुए और लॉटरी की ओर धकेल रही है।
भाजपा ने की फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग
धूमल ने इस निर्णय को पूरी तरह जनविरोधी करार देते हुए सरकार से इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर जनता के साथ खड़ी है और प्रदेश को बर्बादी की ओर ले जाने वाले हर कदम का विरोध करेगी।
