शिमला। शिमला नागरिक सभा ने कोरोना काल के कूड़े, पानी के बिलों, प्रॉपर्टी टैक्स को माफ करने, येलो लाइन के 600 रूपए व अन्य कवर्ड पार्किंग शुल्क को 1000 रुपये से घटाने व दुकानदारों से वसूले जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स के मुद्दे पर नगर निगम शिमला कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी काफी देर तक इन मांगों को लेकर डीसी ऑफिस के बाहर डटे रहे। प्रदर्शनकारी कोरोना काल के बिलों को माफ करने के लिए जोरदार नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा, कपिल शर्मा, सत्यवान पुंडीर, चन्द्रकान्त वर्मा, जियानंद, अमित कुमार, अनिल, रजनी, सुरेंद्र बिट्टू, दलीप, मदन, राहुल, भूमित, गगन, गौरव, बालक राम, किशोरी ढटवालिया, विनोद बिरसांटा, मथुरा दास, राम प्रकाश, रविन्द्र चन्देल, सपना, हैप्पी, रिम्पल, नीतीश राजटा आदि मौजूद रहे।
नागरिक सभा अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में मार्च से सितम्बर के छः महीनों में कोरोना महामारी के कारण शिमला शहर के सत्तर प्रतिशत लोगों का रोज़गार पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से चला गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार व नगर निगम शिमला ने कोरोना काल में आर्थिक तौर पर बुरी तरह से प्रभावित हुई जनता को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी है। शिमला शहर में होटल व रेस्तरां उद्योग पूरी तरह ठप्प हो गया है। इसके कारण इस उद्योग में सीधे रूप से कार्यरत लगभग पांच हजार मजदूरों की नौकरी चली गयी है। पर्यटन का कार्य बिल्कुल खत्म हो गया है। इसके चलते शिमला शहर में हज़ारों टैक्सी चालकों, कुलियों, गाइडों, टूअर एंड ट्रैवल संचालकों आदि का रोज़गार खत्म हो गया है। इस से शिमला में कारोबार व व्यापार भी पूरी तरह खत्म हो गया है क्योंकि शिमला का लगभग चालीस प्रतिशत व्यापार पर्यटन से जुड़ा हुआ है व पर्यटन उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो गया है। हज़ारों रेहड़ी फड़ी तहबाजारी व छोटे कारोबारी तबाह हो गए हैं। दुकानों में कार्यरत सैंकड़ों सेल्जमैन की नौकरी चली गयी है। विभिन्न निजी संस्थानों में कार्यरत मजदूरों व कर्मचारियों की छंटनी हो गयी है। निजी कार्य करने वाले निर्माण मजदूरों का काम पूरी तरह ठप्प हो गया है। फेरी का कार्य करने वाले लोग भी पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। ऐसी स्थिति में शहर की आधी से ज्यादा आबादी को दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
शिमला नाररिक सभा की मुख्य मांगें ये हैं।
1. कोरोना काल के कूड़े के बिलों को माफ किया जाए।
2. कोरोना काल के पानी के बिलों को माफ किया जाए।
3. कूड़े व पानी के बिल हर महीने जारी किए जाएं।
4. पीजी,जिम,रेहड़ी फड़ी तयबजारी व छोटे दुकानदारों से हज़ारों रुपाए के कूड़े के बिल वसूलना बन्द किया जाए। उनके बिलों को तर्कसंगत बनाया जाए।
5. हर साल कूड़े व पानी के बिलों में 10% की वृद्धि पर रोक लगाई जाए।
6. अंतिम तारीख के बाद पानी के बिलों में 10% एक्स्ट्रा चार्ज बन्द किये जाएं।
7. चार महीने के इकट्ठे पानी बिल की जगह हर महीने पानी बिल जारी किए जाएं।
8. कूड़े,पानी व प्रोपर्टी टैक्स की दरों में कटौती की जाए।
9. दिल्ली की तर्ज़ पर 20 हज़ार लीटर पानी मुफ्त उपलब्ध करवाया जाए।
10. कूड़े व पानी के निजीकरण की साज़िश बन्द की जाए।
11. नगर निगम की दुकानों,स्टॉलों,गोदामों व अन्य सम्पत्तियों पर लगाए गए प्रोपर्टी टैक्स को वापिस लिया जाए।
12. कोरोना महामारी के दौरान क्वार्टरों में रहने वाले बहुत सारे लोग अपने पुश्तैनी घरों को कूच कर चुके हैं अतः उनकी बन्द रिहाइशों का कूड़े व पानी का बिल मकान मालिकों से न वसूला जाए।
13. येलो लाइन व अन्य पार्किंग शुल्कों में कटौती की जाए।