शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआईएम) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने केंद्रीय बजट को पूर्णतः आम जनता, किसान, मजदूर, कर्मचारी व मेहनतकश अवाम विरोधी करार दिया है। उसने कहा कि यह बजट अमीरों को और अमीर बनाने वाला तथा निजीकरण को बढ़ावा देने वाला है। बजट गरीब विरोधी है व केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला है।
सीपीआईएम के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों के साथ खड़ी हो गई है व आर्थिक संसाधनों को आम जनता से छीनकर अमीरों के हवाले करने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस बजट से साफ हो गया है कि पूंजीपतियों के मुनाफे पिछले पंद्रह वर्ष के चरम पर पहुंच चुके हैं जबकि मजदूर वर्ग का वेतन कोविड महामारी से पहले की दर से भी कम हुआ है। यही विकसित भारत का मॉडल है जहां पर मेहनतकश जनता की भारी लूट होती है व चंद कॉरपोरेट कंपनियों का बोलबाला है। देश में आर्थिक असमानता चरम पर है।
संजय चौहान ने कहा कि मोदी सरकार अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कई लाख करोड़ रुपये से अधिक का विनिवेश कर चुकी है तथा बेहद संवेदनशील रणनीतिक रक्षा क्षेत्र को भी इसके दायरे में लाकर यह सरकार पूंजीपतियों के आगे घुटने टेक चुकी है तथा देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि बजट में बैंक, बीमा, रेलवे, एयरपोर्टों, बंदरगाहों, ट्रांसपोर्ट, गैस पाइप लाइन, बिजली, सरकारी कम्पनियों के गोदाम व खाली जमीन, सड़कों, स्टेडियम सहित ज़्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण करके बेचने का रास्ता खोल दिया गया है। बीमा क्षेत्र में सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इसका उदाहरण है। बजट में किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का कोई जिक्र नहीं किया गया है। यह बजट *इंडिया ऑन सेल* का बजट है। इस से केवल पूंजीपतियों,उद्योगपतियों व कॉरपोरेट घरानों को फायदा होने वाला है व गरीब और ज़्यादा गरीब होगा।
चौहान ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली मनरेगा व स्कीम वर्करज़ जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। कुल जनसंख्या के 8.6 प्रतिशत आदिवासियों के लिए बजट आबंटन केवल 2.6 प्रतिशत है। पिछले बजट आवंटन में भी स्वीकृत आदिवासी बजट से 17 हजार करोड़ रुपए कम खर्च किया गया था जोकि सरकार आदिवासियों के प्रति मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है। महत्वपूर्ण खनिजों की खदानों के निजीकरण का रास्ता खोल दिया गया है। परमाणु ऊर्जा के निजीकरण पर मोहर लग चुकी है। खजाना खाली होने का रोना रोने वाली केन्द्र सरकार ने पूंजीपतियों से लाखों करोड़ रुपये के बकाया टैक्स को वसूलने पर एक शब्द तक नहीं बोला है। पूंजीपतियों के टैक्स लगातार घटाकर उन्हें भारी राहत दी गयी है। टैक्स चोरी करने वाले पूंजीपतियों को सरकार ने पिछले पांच वर्षों में लगातार संरक्षण दिया है जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सीपीआईएम के राज्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार जोकि आर्थिक संकट से जूझ रही है और निरंतर कर्ज लेने के लिए मजबूर है। केंद्र सरकार द्वारा जो सहायता प्रदान की जाती थी, उसमें निरंतर कटौती की जा रही है। 15वें वित्त आयोग द्वारा जो राजस्व घाटा अनुदान दिया जा रहा है, उसमें निरंतर कटौती की जा रही है और वह अब घटकर केवल 3200 करोड़ रुपए रह गई है। इससे सरकार अपना खर्च चलाना मुश्किल है। इस बजट में प्रदेश की पूरी तरह से अनदेखी की गई है और बजट में प्रदेश के लिए कोई बड़ी परियोजना नहीं है।
