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शिमला। हिमाचल प्रदेश दलित शोषण मुक्ति मंच ने दलित उत्पीड़न व अपनी मांगों को लेकर बुधवार को प्रदेश विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। विधानसभा में जनसभा से पहले मंच के सदस्य पंचायत भवन शिमला में एकत्रित हुए। वहां से मंच के सदस्य एक रैली के रूप में विधानसभा चौक पहुंचे। विधानसभा चौक पर हुई जनसभा को मंच के संयोजक जगत राम, सह संयोजक आशीष कुमार, ठियोग विधानसभा से विधायक राकेश सिंघा, विवेक कश्यप, अमिता चौहान, देवक़ीनन्द, किशोरी लाल, ओमप्रकाश भारती, सोनिया सभरवाल, अनिता देवी, सतपाल मान, गौरव नाथन, एडवोकेट डीसी रावत, मनोज कुमार, कोली समाज के प्रदेश अध्यक्ष उत्तम कश्यप, सचिव राजेश कोश, अम्बेडकर वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष प्रीतपाल मट्टू, रविदास सभा प्रदेशाध्यक्ष कर्म चंद भाटिया, राइट फाउंडेशन अध्यक्ष सुरेश कुमार, बालानन्द, रवि कुमार दलित ने संबोधित किया। 

प्रदर्शन के बाद मंच ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में जगत राम, विवेक कश्यप, राजेश कोष, प्रीतपाल मट्टू, अनीता व राकेश सिंघा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री से मंच के प्रतिनिधियों द्वारा मांग की गई कि सरकारी, अर्धसरकारी नौकरियों में सभी प्रकार की भर्तियों जैसे आउटसोर्स, अनुबन्ध, ठेका, पार्ट टाइम, स्कीम वर्करज़, पीटीए, एसएमसी, स्वास्थ्य वर्करज़ व पंचायत स्तर पर अलग-अलग रूप में भर्तियों में अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए आरक्षण रोस्टर लागू किया जाए। सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में 85वें संविधान संशोधन को लागू किया जाए व बैकलॉग को तुरन्त भरा जाए। निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने के लिए कानून बनाया जाए। 
साथ ही यह मांग भी की गई कि अनुसूचित जाति व जनजाति उप योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। अनुसूचित जाति व जनजाति की जनसंख्या के आधार पर बजट का आबंटन किया जाए। अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण कानून 1989 को सख्ती से लागू किया जाए। एससीएसटी छात्रों की स्कॉलरशिप बहाल की जाए। एससीएसटी आयोग का गठन किया जाए। दलितों पर हमलों, जातिगत हत्याओं, जातिगत भेदभाव, महिला उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। एससीएसटी के किसानों को खाद, बीज, दवाइयों व खेती उपकरणों पर अधिक अनुदान दिया जाए। भारतीय संविधान के खिलाफ लिखने, बोलने व आम जनता को भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

By admin

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